भारत का समुद्री व्यापार तीन हज़ार साल पुराना है

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भारत का समुद्री व्यापार तो हज़ारों साल पुराना है।

1200+ साल पहले भारत का समुद्री व्यापार

रोमन और यूनानी जहाज़: ईसा से 200 साल पहले से रोमन साम्राज्य के जहाज़ दक्षिण भारत के मुज़िरिस, कोरकै, कावेरीपट्टिनम बंदरगाहों पर आते थे। काली मिर्च को “Black Gold” कहते थे। रोम में सोने के सिक्के मिले हैं, तमिल संगम साहित्य में “यवन” यानी यूनानी व्यापारियों का ज़िक्र है।

  • अरब व्यापारी: 7वीं-8वीं शताब्दी से अरब नाविक मानसून हवाओं के सहारे केरल, गुजरात के तट पर आते थे। केरल में इस्लाम इन्हीं व्यापारियों से 7वीं सदी में पहुँचा।चीनी जहाज़: 5वीं शताब्दी से चीनी यात्री फाहियान समुद्र के रास्ते भारत आए। 15वीं सदी में एडमिरल झेंग हे के विशाल चीनी बेड़े कालीकट तक आए।चोल साम्राज्य: 9वीं-13वीं शताब्दी में चोल राजाओं की नौसेना श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया तक गई। राजेंद्र चोल ने 1025 में समुद्र पार श्रीविजय साम्राज्य पर हमला किया था।

फर्क क्या था?
वास्को द गामा से पहले सारा व्यापार अरब और भारतीय व्यापारियों के हाथ में था। यूरोप वाले मिस्र-अरब होकर महँगा मसाला खरीदते थे। 1498 में द गामा ने पहली बार यूरोप से अफ्रीका घूमकर सीधे भारत का रास्ता खोला, जिससे अरब बिचौलिये हट गए और यूरोप का उपनिवेशवाद शुरू हुआ।

तो समुद्र में आना-जाना 1200 साल से नहीं, 3000+ साल से चल रहा था। तमिल कवि कह गए हैं: “तीरै कडल ओडियुम तिरवियम तेडु” — यानी “समुद्र लांघकर भी धन खोजो”।

भारत हमेशा से Maritime Nation रहा है 🌊

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