समय की आंधी // बिना स्वार्थ किसी का भला करके देखिये आपकी तमाम उलझने ऊपर वाला सुलझा देगा

हर एक कदम हर एक प्रसंगहर एक परिस्थिति एक पाठशाला हैप्रशंसा को हमेशा विनम्रता सेस्वीकार करें और आलोचना परगम्भीरता से…

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मुक्ति भी मैं हूँ और बंधन भी मैं हूँ।जैसा हमारा चिंतन और संकल्प होते हैं, वैसे ही हम बन जाते हैं_कृपाशंकर.ऋषिकेश

ध्यान, समर्पण, कूटस्थ, महात्मा, वीतराग और स्थितप्रज्ञ – परमप्रेम सहित परमात्मा का निरंतर चिंतन ही “ध्यान” है, जिसमें हम अपने…

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