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Darshan Samikhya
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Spirituality
जिस व्यक्ति के पूर्व जन्म के और इस जन्म के जैसे संस्कार होते हैं, उसे उसी स्थान पर जाना और वही कार्य करना अच्छा लगता है।शराबखाने में या जुआ घर में जाने पर शांति नहीं मिलती, बल्कि वहां तो शांति की भ्रांति है। इस भ्रांति से बचें।” “इसलिए अच्छे स्थानों पर जाएं, अच्छे काम करें, और सुख शांति आनंद से जिएं।”- “स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़, गुजरात।”
darshansamikhya Sep 14, 2025 0

14.9.2025कोई मंदिर आदि पूजा स्थान दुकान मकान बाजार घर स्कूल कॉलेज पुस्तकालय वाचनालय यदि सब स्थान तो एक से होते…

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Spirituality
वक़्त से हारा या जीता नही जाता, केवल सीखा जाता है,”जीतना बहुत अच्छा है और निरन्तर जीतना और भी श्रेष्ठ…किन्तु अगर निज सम्बन्ध दांव पर लगे हो तो अहंकार का त्याग करके हार जाना भी बहुत कुछ दे जाता है !!!!”
darshansamikhya Sep 14, 2025 0

जो व्यक्ति काम कम लेकिन अपने कार्यों का बखान अधिक करते हैं, वे उन लोगो के सामने कहीं भी नहीं…

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Spirituality
नाराज़गी कभी भी इतनी लम्बी नहीं होनी चाहिये कि इंसान गुजर जाये और नाराजगी फिर भी बनी रह जायें। जीवन में शंका और विश्वास दोनों एक साथ नहीं चलते जहां शंका होती है वहां विश्वास हार जाता है और जहां विश्वास हो वहां शंका को हारना ही पड़ता है।
darshansamikhya Sep 12, 2025 0

नाराज़गी कभी भी इतनी लम्बी नहीं होनी चाहिये कि इंसान गुजर जाये और नाराजगी फिर भी बनी रह जायें। जीवन…

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Spirituality
वैजयंती माला//वैजयंती माला को चमत्कारी माना गया है जो कमलगट्टे के समान शुभ और लाभकारी होता है। वैजयंती माला भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है,जो लोग लाइफ में कई तरह की परेशानियों से गुजर रहे हैं उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय वैजयंती माला जरूर घर में रखना चाहिए और धारण करना चाहिए
darshansamikhya Sep 12, 2025 0

वैजयंती माला को चमत्कारी माना गया है जो कमलगट्टे के समान शुभ और लाभकारी होता है। वैजयंती माला भगवान श्रीकृष्ण…

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Spirituality
स्वरूप बोध ही मानव जीवन के सुख का मूल भी है। जिस प्रकार शीतलता जल का मूल स्वभाव है, उसी प्रकार शांती हमारा भी निज स्वरूप है। इंद्रियों की उच्छृंखलता के कारण ही हम अशांत बने रहते हैं। कपड़ों में चमक साबुन से नहीं आती, साबुन तो केवल उन पर लगी गंदगी को साफ करता है। ऐसे ही शांति भी कहीं बाहर से नहीं मिलेगी, वह तो प्राप्त ही है, बस हम ही अपने स्वरूप को विस्मृत किये हैं
darshansamikhya Sep 11, 2025 0

राधे – राधे ॥ आज का भगवद् चिन्तन ॥ स्वरूप बोध स्वरूप बोध ही मानव जीवन के सुख का मूल…

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श्रीमद् भागवत भाव //संसार का हरेक मनुष्य , चाहे वह किसी भी उम्र का हो , यह तो जानता है , कि मैं मरूँगा तो अवश्य , और मौत कभी भी आ सकती है , लेकिन फिर भी उसकी तैयारी करता हुआ सा दिखाई नहीं देता । यहाँ तक , कि वे बूढ़े भी , जिनके कि पैर कब्र में लटके हुए हैं , वे भी कुछ और कमा लेना चाहते हैं-भाई रामगोपालानन्द , गोयल ,ऋषिकेश
darshansamikhya Sep 10, 2025 0

” आज का श्रीमद् भागवत भाव “★ भागवत कहती है , कि जैसे लोहे – लकडी की बैलगाडी को खींचने…

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माता पिता को छोड़ कर दुनिया के हर रिश्ते में किसी न किसी तरह का स्वार्थ छिपा होता है।कहा जाता है, ” वक़्त अपना पराया की पहचान करा देता है”।
darshansamikhya Sep 9, 2025 0

“हम सभी जानते हैं, ” जा पर कृपा राम की होइ, ता पर कृपा करे सब कोई”। अर्थात् इस दुनिया…

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ग्रहों के छह प्रकार के बल:ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति और उनके बल का अध्ययन फलित ज्योतिष के मूल आधारों में से एक है। ग्रहों का प्रभाव उनके बल पर निर्भर करता है, और ये बल उनके स्थान, दिशा, समय, स्वभाव, गति, और दृष्टि जैसे विभिन्न कारकों से निर्धारित होते हैं-manish chandra pandey..ayodhya
darshansamikhya Sep 8, 2025 0

“ग्रहों के छह प्रकार के बल: एक ज्योतिषीय शोधप्रबंध” ✓•प्रस्तावना: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति और उनके बल का…

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Spirituality
पंचामृत’ और ‘चरणामृत’ में क्या अंतर है//कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हो या पूजा-पाठ, प्रसाद रूप में पंचामृत और चरणामृत जरूर बनाए जाते हैं। इन दोनों का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा होता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भी कृष्ण लला को पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया जाता है।
darshansamikhya Sep 7, 2025 0

‘पंचामृत’ और ‘चरणामृत’ में क्या अंतर है? कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हो या पूजा-पाठ, प्रसाद रूप में पंचामृत और चरणामृत…

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କୃଷ୍ଣଙ୍କ ୧୬୦୦୦ ପତ୍ନୀ – କଥାର ସତ୍ୟତା//ଆଜିକାଲି ଅନେକ ଲୋକଙ୍କର ଭୁଲ ଧାରଣା ଅଛି ଯେ କୃଷ୍ଣଙ୍କର ୧୬୦୦୦ ସ୍ତ୍ରୀ ଥିଲେ। କାରଣ ସେମାନେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ କଥା ଜାଣିବା ପରିବର୍ତ୍ତେ କେବଳ କଥାଟିର କିଛି ଅଂଶ ପଢ଼ନ୍ତି।
darshansamikhya Sep 6, 2025 0

କୃଷ୍ଣଙ୍କ ୧୬୦୦୦ ପତ୍ନୀ – କଥାର ସତ୍ୟତା ଆଜିକାଲି ଅନେକ ଲୋକଙ୍କର ଭୁଲ ଧାରଣା ଅଛି ଯେ କୃଷ୍ଣଙ୍କର ୧୬୦୦୦ ସ୍ତ୍ରୀ ଥିଲେ। କାରଣ ସେମାନେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ…

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  • देवघर // दिवंगत उमेश केसरी जी के असामयिक निधन पर भारतीय वैश्य महासभा के जिला अध्यक्ष श्री प्रभाष गुप्ता भावभीनी श्रद्धांजलि
  • ତ୍ରିବେଣୀ ଅମାବାସ୍ୟା//ମାଘ ମାସର ଅମାବାସ୍ୟାକୁ ମୌନୀ ଅମାବାସ୍ୟା ବା ତ୍ରିବେଣୀ ଅମାବାସ୍ୟା କହାଯାଏ । ଏହି ଦିନ କୁମ୍ଭ ମେଳାର ପବିତ୍ର ସ୍ଥାନରେ ବୁଡ଼ ପକାଇବାକୁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁମାନେ ଅଧିକ ପସନ୍ଦ କରନ୍ତି । ଅନେକ ଧାର୍ମିକ ବ୍ୟକ୍ତି ଏହିଦିନ ତ୍ରିବେଣୀ ସଙ୍ଗମରେ ସ୍ନାନ ପୂର୍ବକ ମୌନବ୍ରତ ପାଳନ କରନ୍ତି ।
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darshansamikhya Jan 18, 2026
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darshansamikhya Jan 18, 2026

Darshan smikhya the weekly odia newspaper supplement publish from since 1988 having a large number of readers, viewers in state of odisha and covered 30 districts in 30 year having approximately 30000 well wishers

Editor -Baikunta Nath Jena ,Cuttack Odisha, Ph - 9937465240, RNI NO -ODIODI/2018/77356

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