EXIT POLLS//भारत मे सबसे दिलचस्प चुनाव कैसे होते हैं _आनंद कुमार

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अगर आपने सरपंच के चुनाव में गांव की राजनीति नहीं देखी हो तो जरूर एक बार सरपंचों के चुनाव के समय गांव आना चाहिए!
वास्तव मे गांव की सरपंच चुनाव की राजनीति देखनी चाहिए….

सरपंच_चुनाव

भारत मे सबसे दिलचस्प चुनाव सरपंच का होता है! लोकसभा, विधानसभा चुनावो मे जहाँ औसत वोटिंग 60-70% से ज्यादा नही जाता लेकिन सरपंच चुनाव मे ये आंकडा 90-95% से कम नही रहता ! गाँव मे प्राकृतिक मौत मर रहा बुजूर्ग भी वोट डालने के लिए 1-2 घंटे तक यमराज़ को “वैट” करने के लिए विवश कर सकता है ! आईये जानते हैं सरपंच चुनावो के वोटर की कैटेगिरी…

स्पष्टवादी – इस श्रेणी का मतदाता चुनावों की बीसात बिछते ही अपना मन बना लेता है की किस उम्मीदवार के चुनाव चिन्ह वाला खटका दबाना हैं ! इनके सामने कोई प्रत्याशी कितना ही नाक रगड़े लेकिन ये किसी की लाला चौपड़ी मे नही आते…ये अपना मानस नही बल्की अपना अटल ईरादा बना कर रखते हैं…. ऐसे लोग सबसे सुलझे हुये होते हैं….लोकतंत्र मे ऐसे लोगो को आदर्श मतदाता भी बोल सकते हैं !

हवाबाज- हवाबाज मतदाता परम बुद्धिमान होता है ! ये चुपचाप उम्मीदवारो की फूं…. फाट करती गाडियों को देखता रहता है ओर देखुंगा…सोचुंगा… आदि शोर्ट डायलॉग बोल कर ऊम्मीदवारो की उम्मीद को बनाये रखता है ! चुनाव से दो तीन दिन पहले ये बुद्धिमान मतदाता रामविलास जी पासवान की तरह भांप जाता है की फलाना आदमी सरपंच जीतेगा ! जीत की भनक मिलते ही ये हवाबाज हवा के रुख के साथ अपना तालमेल बना लेता है ! जिताऊ कैड़ीड़ेट को रातो रात खबर कर देता है की भाईजी चिंता ना करो… म्हारो वोट थान्ने ही जा सी…!

दारूबाज- इस श्रेणी के वोटर के लिए चुनाव किसी त्यौहार से कम नही होते ! चुनावी महीना इस वोटर के लिए पांच वर्ष के सबसे सुखद दिन होते हैं ! चुनावी माहौल शुरू होने के बाद ये बेसब्री से इंतज़ार करता है की दारू बँटनी कब शुरू होगी ! सरपंच पद के सभी दावेदारो से तालमेल बना लेने का बड़ा धांसू हुनर इनमे पाया जाता है ! ये दारू की बोतल ओर हाफ लेने मे किसी भी ऊमीदवार से भेदभाव नही करते… सबसे लेते हैं ! आम दिनो मे बामुश्किल एक देशी क्वाटर से काम चलाने वाले ये लोग इस :सीजन” मे रोजाना अंग्रेजी रम, व्हीसकी ओर बीयर तक से अपना गला गीला ठंडा करते हैं ! गांवो मे आप ज़ायेंगे तो दिन मे ही इनकी लाल आंखे देख कर अन्दाजा लगा सकते हो की चुनाव चल रहे हैं ! वोटिंग के समय भी चार पेग ब्रांड़ी और रम की लगा कर नशे मे ये जो बटन दिख जाये उसे दबा कर आ ज़ाते हैं…

लक्ष्मीचन्द- इस कैटेगिरी के मतदाता लोकतंत्र की खूबसुरती पर काले धब्बे की तरह होते हैं ! ये किसी की हार जीत से कोई सरोकार नही रखते ! इस श्रेणी के आदमी अपनी पारखी आँखो से पहले अन्दाजा लगाते हैं की कौन सा उम्मीदवार ज्यादा “मालदार” है…फिर उसको बता देते हैं की भाईसाहब म्हारे परिवार के 76 वोट हैं… इनके 2000 पर वोट के हिसाब से 152000 रूपये दे दो…!

टटपुंजिये- ये वो लोग होते हैं ज़िनके कहने से उनकी लूगाई तक वोट नही देती लेकिन ये चुनावो मे उम्मीदवार के सामने खुद को ऐसे प्रजेंट करेंगे जैसे वोटो के पुरे समीकरण इन्ही बैचारो के पास है ! लगातार थोथी दोड-धूप करने के बाद चुनाव से 2 दिन पहले ये अपने कैंड़ीड़ेट को धीरे से बोलते हैं की… भाई साहब ! किसी ज़रूरी काम से 20000 रूपये चाहिये मुझे ! अगले महीने लौटा दुंगा ! बैचारा जंग मे फसा उम्मीदवार मना कर नही पाता….

भावकेभूखे – ज़िन लोगो को गाँव मे कोई पूछता नही, जिन्हे चौपाल पर कोई भी आगे से राम राम तक नही करता…बेचारे ऐसे महत्वहीन लोगो के लिए भी चुनाव सुखद समय होता है ! ऐसे लोग चुनावी माहौल मे अपना महत्व बनाने के लिए हर किसी उम्मीदवार को वोट देने से ना,, नुकुर करते हैं ! उम्मीदवार ओर उसके कार्यकर्ता जब ऐसे महत्व के भूखे लोगो के आगे पीछे घूमते हैं… बार बार फ़ोन करते हैं तो ऐसे लोग फूफा जी की तरह ज्यादा भाव खाने लगते हैं…ओर आखिरी समय मे ये किसी एक प्रत्याशी के पीछे हो लेते हैं !

भविष्यवाणी_टीम- भविष्यवाणी टीम के लोग पीपल के नीचे गट्टे पर बैठ कर दिन भर बताते रहते हैं की कौनसा प्रत्याशी जीत रहा और कोन हार रहा है ! ये वास्तव मे इतने पारखी होते हैं की बीडी पीते पीते आपको बता देंगे की फलाने का बेटा किसको वोट देगा ओर फलाने की लूगाई का वोट कहाँ जाने वाला है ! इन चुनावी पंडितों का मुकाबला प्रशांत किशोर( PK ) जैसे MBA पास चुनावी रणनीतिकार भी नही कर सकते !

मौकापरस्त- ये वो नमुने होते हैं जो मतदान से पहले किसी के साथ नही लगते ! ये पूर्णत: गुप्त मतदान करते हैं लेकिन परिणाम आने के बाद जो कोई प्रत्याशी विजयी हो…ये उसके लिए पाजामा फाड फाड कर नारे लगा कर चुनाव का पुरा रस ले लेते है !

वोटकटवाउमीदवार _ एक दो उमीदवार ऐसे होते उन का मकसद चुनाव जीतना नही होता है उन का मकसद सिर्फ उस उम्मीदवार को हारना होता है जो जीतने के काबिल है और ऐसे लोग ऐन वक्त पर अपने वोट यह बोल कर दुसरे ऐसे व्यक्ति को दिला देते जो जीत भी नही रहा है ,,कि मे तो जीत नही रहा हूँ आप उस अमुक व्यक्ति को वोट दे देना …….

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