ये सुनते ही किसी पुरानी लोककथा जैसी बात लगती है। लेकिन सच्ची घटना है
मध्यप्रदेश गुना जिला
- 100 साल पुराना सांप – नाग बन जाता है, उसके सिर पर मणि होती है
- बैराज/गढ़ का रक्षक – कहते हैं ऐसे सांप खजाने या पुराने मंदिर की रक्षा करते हैं
- इच्छाधारी – बूढ़ा होने पर सांप रूप बदल सकता है, इंसान बनकर घूमता है
एक समय की बात है। बैराज गढ़ के खंडहर में एक बहुत बूढ़ा सांप रहता था। उसकी उम्र कोई नहीं जानता था। गांव वाले कहते थे कि जब बैराज बना था, तभी से वो यहीं है।
गर्मियों में जब बैराज का पानी सूख जाता, तो वो सांप बाहर निकलता। लेकिन उसने आजतक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। उल्टा, जब भी कोई बच्चा तालाब में डूबने लगता, तो जाने कहां से आकर वो उसे धक्का देकर किनारे कर देता।
लोग कहते – “ये बैराज गढ़ का रखवाला है। जब तक ये है, गांव पर कोई आफत नहीं आएगी
सफेद मूंछ निकल आई है उसकी… मतलब अब तो वो सचमुच का “नाग बाबा” बन गया है।
गांव में मान्यता है कि:
जिस सांप की मूंछ सफेद हो जाए, वो 100 साल से ऊपर का हो जाता है। ऐसा सांप फिर आम सांप नहीं रहता:
- ज्ञानी हो जाता है – उसे इंसानों की बोली समझ आने लगती है
- मणिधारी बनता है – कहते हैं ऐसे सांप के सिर पर मणि उग आती है जो अंधेरे में चमकती है
- गढ़ का मुखिया – पूरा बैराज गढ़ उसी के हुक्म से चलता है। बाकी सांप-संपोले सब उसके चेले
बैराज गढ़ की कहानी आगे:
बूढ़े की सफेद मूंछें जब चांदनी रात में हवा में लहरातीं, तो लगता जैसे गढ़ का बूढ़ा चौकीदार गश्त लगा रहा हो।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि एक बार डकैत बैराज गढ़ का खजाना लूटने आए। रात को खुदाई शुरू की ही थी कि बिल से वो सफेद मूंछ वाला निकला। न फुफकारा, न डसा। बस उन डकैतों के सामने खड़ा हो गया और अपनी मूंछें फटकार दीं।
डकैतों की तो हालत खराब। कहते हैं उसकी मूंछ से ऐसी रोशनी निकली कि सबकी आंखें चौंधिया गईं। सुबह गांव वालों को वो सब बैराज के बाहर बेसुध मिले, और खजाने को हाथ भी न लगा पाए।
तब से कहावत बन गई – “बैराज गढ़ में सफेद मूंछ वाले बाबा रहते हैं, बुरी नजर वालों की खैर नहीं।












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