चित्रकूट //धारकुंडी आश्रम और वहां के सिद्ध संत श्री स्वामी परमानंद परमहंस जी ने शेर को आध्यात्मिक शक्ति से अपना शिष्य बनाया

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चित्रकूट में शेर साथ बाबा

इस घटना मुख्य रूप से धारकुंडी आश्रम और वहां के सिद्ध संत श्री स्वामी परमानंद परमहंस जी से जुड़ी हुई है。

सतना ज़िले के घने जंगलों में स्थित इस आश्रम के संत के बारे में प्रचलित है कि वे आध्यात्मिक शक्ति से वन्यजीवों को वश में रखते थे और शेर उनकी गुफा तक आते थे。 


धारकुंडी आश्रम और संत की जानकारी
स्थान

यह स्थान समुद्र तल से लगभग १०५० फुट की ऊँचाई पर घने जंगलों में स्थित है。
इतिहास: योगिराज श्री स्वामी परमानंद परमहंस जी ने चित्रकूट के अनुसूया आश्रम में लगभग ११ वर्ष गहन साधना की थी。 इसके बाद १९५६ में वे धारकुंडी आ गए थे。
शेर की घटना: ऐसी मान्यता और लोक-कथा है कि वे घने जंगलों में एक गुफा में निवास करते थे और उस दौरान एक शेर उनके साथ रहता था。 
अन्य गुप्त संत:
चित्रकूट के दुर्गम और घने जंगलों में कई ऐसे “गुप्त संत” (जिन्हें मचान वाले बाबा या गुफा वाले बालयोगी भी कहा जाता है) भी रहते हैं, जो कठोर तपस्या करते हैं。 स्थानीय और यूट्यूब के वायरल वीडियोज़ में अक्सर इन जंगलों में संतों के साथ शेरों या अन्य वन्यजीवों के आने का ज़िक्र किया जाता है。

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