रूस और चीन ने बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वे अब अपने द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर का उपयोग नहीं करेंगे और इसके बजाय अपनी-अपनी मुद्राओं में लेन-देन करेंगे।
इस फैसले का उद्देश्य डॉलर पर निर्भरता कम करना और आर्थिक संप्रभुता को मजबूत करना है। इसे वैश्विक स्तर पर “डी-डॉलराइजेशन” की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक व्यापार, मुद्रा बाजार और भू-राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।












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