मुंडन की कलम // सहारनपुर शिक्षा के मंदिर अब ‘व्यापार के अड्डे’ बन गए हैं। गली-मोहल्लों में आवासीय बिल्डिंग को स्कूल में बदलने का खेल चल रहा है। शुरू में 2-4 कमरों का नक्शा पास कराकर CBSE की मान्यता ले ली, बाद में 100 कमरों की बिल्डिंग खड़ी कर दी

Spread the love

खबर मुंडन की कलम से उगलता सच

Oplus_131072

खबर सूत्रों पर आधारित

सहारनपुर

*स्टोरी: ‘

गली-मोहल्ले में स्कूल या मौत का कुआं?’ – सहारनपुर में आवासीय बिल्डिंग में 100 कमरों के स्कूल, SDA खामोश*

सहारनपुर। शिक्षा के मंदिर अब ‘व्यापार के अड्डे’ बन गए हैं। गली-मोहल्लों में आवासीय बिल्डिंग को स्कूल में बदलने का खेल चल रहा है। शुरू में 2-4 कमरों का नक्शा पास कराकर CBSE की मान्यता ले ली, बाद में 100 कमरों की बिल्डिंग खड़ी कर दी। आरोप है कि सहारनपुर विकास प्राधिकरण SDA के इंजीनियर-मेट सब जानते हुए भी इन्हें ‘पुराना स्कूल’ बताकर फाइल दबा देते हैं।

1. ‘स्कूल का खेल’ – 4 स्टेप में समझो आरोप

  1. आवासीय नक्शा, कॉमर्शियल यूज: शिकायत है कि रिहायशी प्लॉट पर 2 कमरे का नक्शा पास कराया। फिर उसी पर 3-4 मंजिल, 100 कमरों का स्कूल बना दिया। लैंड यूज चेंज नहीं कराया।
  2. CBSE मान्यता का जुगाड़: आरोप है कि CBSE को दिखाने के लिए कागजों में ‘छोटा स्कूल’ बताया। मान्यता मिलते ही अवैध निर्माण शुरू। बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट बिना ही बच्चे पढ़ रहे।
  3. SDA की चुप्पी: स्थानीय लोगों का कहना है कि SDA के इंजीनियर-मेट निरीक्षण में आते हैं, पर ‘पुराना बना है’ कहकर चले जाते हैं। ये नहीं बताते कि किस वर्ष बना, लैंड यूज क्या था, परिवर्तन हुआ या नहीं
  4. बड़े इंटर कॉलेज भी शामिल: आरोप है कि शहर के कई नामी इंटर कॉलेज भी आवासीय/अवैध बिल्डिंग में चल रहे हैं। आग, भूकंप से बचाव के इंतजाम जीरो।

2. भूकंप आया तो कौन जिम्मेदार? 3 बड़े खतरे

  1. स्ट्रक्चर सेफ्टी नहीं: आवासीय नक्शे पर बनी बिल्डिंग 1000 बच्चों का लोड नहीं झेल सकती। भूकंप जोन-IV में है सहारनपुर। हादसा हुआ तो सैकड़ों जानें जाएंगी।
  2. फायर NOC फर्जी?: CBSE मान्यता के लिए फायर NOC चाहिए। आरोप है कि 2 कमरे की NOC पर 100 कमरे चल रहे। न सीढ़ी चौड़ी, न इमरजेंसी गेट
  3. पार्किंग-खेल मैदान गायब: मानक कहते हैं 40% खुली जगह हो। गली के स्कूल में बच्चा गेट से निकलते ही सड़क पर। हादसे का इंतजार।

3. SDA कंट्रोल एक्ट क्या कहता है? नियम vs हकीकत
नियम जमीन पर आरोप
लैंड यूज चेंज जरूरी: आवासीय से शैक्षणिक करने के लिए SDA से अनुमति आरोप है कि 90% स्कूलों ने नहीं कराया
बिल्डिंग बायलॉज: स्कूल के लिए सेटबैक, FAR, हाइट के अलग मानक गली में 3 साइड जीरो सेटबैक पर 4 मंजिल
कंप्लीशन सर्टिफिकेट: बिना इसके बिल्डिंग इस्तेमाल नहीं कर सकते मान्यता 2 कमरे की, चल रहे 100 कमरे
SDA एक्ट के बाद निर्माण: 1984 के बाद बने सभी निर्माण पर SDA की अनुमति जरूरी इंजीनियर ये नहीं बताते कि बिल्डिंग कब बनी
4. SDA के इंजीनियर-मेट पर 3 सवाल

  1. ‘पुराना स्कूल’ का सबूत क्या?: अगर बिल्डिंग पुरानी है तो हाउस टैक्स, बिजली कनेक्शन की साल बताओ। 1984 के बाद बनी तो SDA की NOC कहां है?
  2. लैंड यूज क्यों नहीं चेक?: हर निरीक्षण में लैंड यूज स्टेटस लिखना अनिवार्य है। फाइल में ‘आवासीय’ होते हुए ‘शैक्षणिक’ कैसे चल रहा?
  3. नक्शा vs मौका: नक्शा 2 कमरे का, मौके पर 100 कमरे। सीलिंग क्यों नहीं? क्या ‘मंथली’ पहुंच रही है?

5. भूकंप या हादसा हुआ तो IPC में केस

  1. IPC 304A: लापरवाही से मौत = 2 साल जेल। प्रिंसिपल + बिल्डिंग मालिक + SDA इंजीनियर तीनों पर।
  2. IPC 336: दूसरों की जान खतरे में डालना = 3 माह जेल।
  3. UP Education Act: बिना मान्यता स्कूल चलाना = 1 लाख जुर्माना + स्कूल बंद।

6. योगी सरकार से 4 मांग

  1. हर स्कूल का स्ट्रक्चर ऑडिट: IIT रुड़की से सहारनपुर के सभी स्कूलों की भूकंप रोधी जांच। अनफिट बिल्डिंग तुरंत सील।
  2. लैंड यूज पब्लिक करो: SDA वेबसाइट पर हर स्कूल का नक्शा, लैंड यूज, निर्माण वर्ष डालो। जनता खुद चेक करे।
  3. SDA इंजीनियरों की संपत्ति जांच: जिस इंजीनियर के एरिया में अवैध स्कूल मिला, उसकी 5 साल की संपत्ति विजिलेंस जांचे।
  4. CBSE से शिकायत: CBSE को लिखो कि 2 कमरे की मान्यता पर 100 कमरे चल रहे। मान्यता रद्द हो।

7. पैरेंट्स क्या करें? 3 चेक लिस्ट

  1. बिल्डिंग देखें: स्कूल गली में 3 तरफ से बंद है? सीढ़ी 4 फुट से कम है? तो एडमिशन मत कराओ।
  2. NOC मांगो: प्रिंसिपल से फायर NOC, बिल्डिंग कंप्लीशन, लैंड यूज चेंज की कॉपी मांगो। न दे तो 1076 पर भेजो।
  3. SDA में RTI: अपने बच्चे के स्कूल का नक्शा पास है या नहीं, RTI से पूछो। 30 दिन में जवाब बाध्यकारी।

निचोड़: ‘शिक्षा के नाम पर बच्चों की जान से खेल’
आरोप है कि सहारनपुर में आवासीय बिल्डिंग में इंटर कॉलेज चल रहे हैं। 2 कमरे के नक्शे पर 100 कमरे बन गए। SDA खामोश है। इंजीनियर-मेट ‘पुराना है’ बोलकर निकल जाते हैं।

अगर कल भूकंप आया और 500 बच्चे दब गए तो जिम्मेदार कौन? प्रिंसिपल, बिल्डिंग मालिक या वो इंजीनियर जिसने आंख बंद की?

SDA व शिक्षा विभाग का पक्ष: खबर लिखे जाने तक SDA VC व BSA से संपर्क नहीं हो पाया। जवाब आते ही अपडेट किया जाएगा।

डिस्क्लेमर: स्टोरी ‘आरोप है’, ‘शिकायत मिली है’ पर आधारित है। जांच और दस्तावेज के बाद ही कोई संस्था/व्यक्ति दोषी माना जाए। मकसद जनहित व बच्चों की सुरक्षा है।

रिपोर्ट इरशाद खान मुंडन मुख्य सम्पादक वेस्टर्न हाक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *