अगर अमेरिका और इज़राइल ईरान में ज़मीनी फौज भेजते हैं, तो मैं खुदा की कसम खाता हूँ कि हम अपने भाइयों ईरान की मदद करेंगे। हम ईरान में ब्रिगेड्स भेजेंगे और लड़ने के लिए रज़ाक़ार भी भेज देंगे।”
सूडानी आर्मी जनरल का बयान:

ईरानी हमले में मारे गए या घायल हुए 650 अमेरिकी सैनिक… पीछे हटाना पड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर, IRGC का बड़ा दावा
ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब और भी घातक हो गई है। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उनके जवाबी हमले ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ में भारी नुकसान झेलने के बाद अमेरिकी विमान वाहक पोत अब्राहम लिंकन पीछे हट गया है. तेहरान के मुताबिक, दो दिनों में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं…
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया है, केवल चीन के जहाजों को गुजरने की अनुमति… बाकी दुनिया के लिए “नो एंट्री
ईरान ने घोषणा की है कि युद्ध में तेहरान का साथ देने के लिए बीजिंग के प्रति आभार स्वरूप सिर्फ़ चीन को ही होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने दिया जाएगा, बाकी सभी जहाजों (तेल टैंकर सहित) के लिए स्ट्रेट बंद है, और चेतावनी साफ़ है कोई अनधिकृत जहाज गुजरने की कोशिश करेगा तो ईरानी फोर्सेस उसे सीधे निशाना बनाएंगे, यहाँ तक कि “आग लगा देंगे
यह दुनिया का वो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है जहाँ से 20% से ज्यादा वैश्विक क्रूड ऑयल बहुत सारा LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) गुजरता है।
श्रीलंका..भारत के विशाखा पटनम से अभ्यास कर वापस लौट रहे ईरानी युद्धपोत ‘डेना’ हिंद महासागर में श्रीलंका के नजदीक एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हमला कर उसे डुबो दिया। जहाज पर कुल 180 चालक दल सवार थे, जिनमें से 148 नाविक लापता बताए जा रहे हैं, वहीं कई स्रोत उनके मारे जाने की बात कह रहे हैं। इसके अलावा 32 नाविक गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। भारत ने बहुदेशीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन 2026’ का आयोजन किया था। इसमें भाग लेने वालों में ईरानी नौसेना का युद्धपोत ‘डेना’ (Dena), भी शामिल था जो भारत के बुलावे पर इस अभ्यास में शामिल हुआ था… महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह जहाज कोई युद्धक जहाज नहीं था। यह भारत-ईरान के शांतिपूर्ण कूटनीतिक कार्यक्रम (MILAN) से लौट रहा था और भारत के बुलावे पर आया था। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था, जब इस पर हमला हुआ। अब तक यह माना जा रहा था कि पश्चिम एशिया का संघर्ष केवल फारस की खाड़ी तक सीमित रहेगा। लेकिन इस घटना ने युद्ध की सीमाओं को बढ़ा दिया है। श्रीलंका के निकट हिंद महासागर में हुआ यह हमला दर्शाता है कि अब युद्ध का दायरा दक्षिण एशिया के ‘प्रभाव क्षेत्र’ में प्रवेश कर चुका है।खाड़ी देशों के तटस्थ रहने और तुर्की द्वारा मार्ग बंद करने के बाद, अमेरिका के पास रसद के विकल्प सीमित हो गए हैं। अमेरिका ने भारत को एक ‘फॉलबैक’ (विकल्प) बना लिया है!भारत के लिए यह स्थिति न केवल सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत जटिल हो गई है। ईरान का यह जहाज भारत के निमंत्रण पर ‘मिलन 2026’ में आया था। भारतीय अतिथि के रूप में आए जहाज पर अमेरिकी हमला भारत की संप्रभुता और सुरक्षा गारंटी पर एक प्रश्नचिह्न लगाता है।यदि इसकी प्रतिक्रिया में भारत भी अन्य देशों की तरह अपने बंदरगाहों के विकल्प बंद कर देता है, तो हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना का संचालन लगभग असंभव हो जाएगा।












Leave a Reply