पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर की माता एक महिषी (भैंस) थीं, जो रम्भ असुर की पत्नी थीं। जब रम्भ की मृत्यु हो गई, तब शोक में जलकर भस्म होने के बजाय, वह एक ऋषि (कुछ कथाओं में महर्षि) के पास गईं और उनके ऊपर जल छिड़ककर उनसे संतान का आशीर्वाद मांगा,

ऋषि क्रोधित हो कर अभिशाप दिए जिसके फलस्वरूप महिषासुर का जन्म हुआ।

महिषासुर के पिता रम्भ थे, जो असुरों के राजा थे।
पिता की मृत्यु के बाद, उसकी माता ने तपस्या/आशीर्वाद के माध्यम से एक ऐसे पुत्र को जन्म दिया जो अपनी इच्छा से भैंसा या राक्षस का रूप धारण कर सकता था।
परिणाम: अपनी असीमित शक्तियों के कारण, महिषासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाया, जिसे बाद में माँ दुर्गा ने ‘महिषासुर मर्दिनी’ के रूप में वध किया।











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