कुंजल क्रिया योग//पाचन तंत्र को शुद्ध करने, एसिडिटी, बलगम और गैस को दूर करने का एक प्राकृतिक तरीका है कुंजल क्रिया योग

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कुंजल क्रिया (वमन धौति) हठ योग की एक प्रमुख षट्कर्म शुद्धि प्रक्रिया है, जिसमें गुनगुना नमकीन पानी पीकर पेट की सफाई के लिए उसे उल्टी के द्वारा बाहर निकाला जाता है। यह पाचन तंत्र को शुद्ध करने, एसिडिटी, बलगम और गैस को दूर करने का एक प्राकृतिक तरीका है, जिसे सुबह खाली पेट किया जाना चाहिए। 


कुंजल क्रिया के मुख्य लाभ:
पाचन तंत्र की सफाई: यह पेट में जमा अतिरिक्त एसिड और गंदगी को बाहर निकालता है।
एसिडिटी में आराम: पेट के पीएच (pH) स्तर को संतुलित करने में सहायक है।
श्वसन प्रणाली: कफ, दमा और सर्दी-खांसी में राहत मिल सकती है।
मानसिक स्पष्टता: पेट साफ होने से मन को बोझ-मुक्त और हल्का महसूस होता है। 


कुंजल क्रिया करने की विधि (Step-by-Step):
पानी तैयार करें: लगभग
से
लीटर गुनगुना पानी लें और उसमें

चम्मच सेंधा नमक मिलाएं।
पानी पिएं: कागासन में बैठकर (या सीधे खड़े होकर) पानी को तेजी से तब तक पिएं जब तक कि पेट पूरी तरह भर न जाए।
पानी बाहर निकालें: कागासन में झुकें, अपनी दो उंगलियों (मध्यमा और तर्जनी) को जीभ के पिछले हिस्से पर रखकर पेट के पानी को उल्टी के जरिए बाहर निकालें।
पूर्णता: यह तब तक करें जब तक कि पिया हुआ सारा पानी बाहर न निकल जाए। 


सावधानियां और महत्वपूर्ण सुझाव:
खाली पेट: यह क्रिया केवल सुबह के समय खाली पेट की जानी चाहिए।
विशेषज्ञ की सलाह: पहली बार योग गुरु या किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।
किसे नहीं करना चाहिए: उच्च रक्तचाप, हर्निया, दिल की बीमारी, अल्सर या गर्भावस्था के दौरान यह क्रिया न करें।
आवृत्ति: इसे सप्ताह में केवल एक बार ही करना पर्याप्त माना जाता है।
जिन लोगों को निम्न रक्तचाप, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अल्सर और हर्निया है, उन्हें इससे बचना चाहिए। अपनी उंगलियों को मुंह के अंदर डालने से पहले, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि वे साफ हों। कुंजल क्रिया के बाद आप जल नेति का अभ्यास कर सकते हैं।source:Rishikesh Yoga Valley

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