सोमवार का दिन भगवान शिव (महादेव) को समर्पित है क्योंकि पौराणिक मान्यता के अनुसार, सोम (चंद्रमा) ने शिवजी की आराधना कर क्षय रोग से मुक्ति पाई थी, जिससे वे ‘सोमेश्वर’ कहलाए।
महादेव को सोमवार अत्यंत प्रिय है; वे सोम अर्थात चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण करते हैं और सोमवार की पूजा से मन को शांति व सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
सोमवार को महादेव की पूजा के मुख्य कारण और महत्व:
चंद्रदेव की कथा: चन्द्रमा को प्रजापति दक्ष ने क्षय होने का श्राप दिया था। चंद्रमा ने भगवान शिव की तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया और संजीवनी प्रदान की। इसीलिए सोमवार को शिव पूजा की जाती है।
शीघ्र प्रसन्नता: शिवजी को ‘भोलेनाथ’ कहा जाता है, वे बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। सोमवार को सच्चे मन से पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

मानसिक शांति और सौम्यता: ‘सोम’ का अर्थ सौम्य (शांत) भी होता है। सोमवार के दिन पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन शांत रहता है।
सकारात्मक ऊर्जा: इस दिन भगवान शिव की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और आत्मबल बढ़ता है।
पूजा विधि: सोमवार के दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, और बेलपत्र चढ़ाते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं।
सोमवार का व्रत अक्सर अच्छे जीवनसाथी की कामना (अविवाहितों के लिए) और परिवार की खुशहाली (विवाहितों के लिए) के लिए रखा जाता है।











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