नूरजहां//ओह बहुत बीमार थी जहांगीर बोले तख्त का वारिस नहीं, दिल का वारिस चाहिए। बीमारी उसकी, इलाज मेरा”।सबसे मशहूर: “जहाँगीर और नूरजहाँ” प्रेम विवाह

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सबसे मशहूर: “जहाँगीर और नूरजहाँ” प्रेम विवाह

नूरजहाँ का असली नाम मेहर-उन-निसा
पहली शादी हुई शेर अफगन से। 1607 में शेर अफगन मारा गया।

नूरजहाँ विधवा हुईं, साथ में बीमारी भी थी – माइग्रेन और उदासी का रोग।
दरबारी बोलते थे “मनहूस है, बीमार रहती है”

1611 में जहाँगीर ने निकाह किया
वजीर चिल्लाए: “हुजूर, विधवा है, बीमार है, 34 साल की है। बदनामी होगी”

जहाँगीर बोला: “तख्त का वारिस नहीं, दिल का वारिस चाहिए। बीमारी उसकी, इलाज मेरा”

फिर क्या हुआ?

1. नूरजहाँ बनी “बादशाह बेगम”
सिक्के पर नाम: “ब-हुक्म बादशाह जहाँगीर, सिक्का जद ब-नाम नूरजहाँ”
मतलब: जहाँगीर के हुक्म से, नूरजहाँ के नाम का सिक्का।
औरत के नाम का सिक्कामुगल इतिहास में पहली बार

2. हुकूमत चलाई
जहाँगीर अफीम-शराब में रहता, बीमार रहता।
नूरजहाँ ने दरबार संभाला, फरमान जारी किए, जंग की नीति बनाई।
“दिमाग से धनी” निकलीं – बीमार शरीर, पर तेज अक्ल

3. इश्क़ में वफा
1627 में जहाँगीर मरा। शाहजहाँ ने गद्दी ली।
नूरजहाँ को नजरबंद कर दिया। पेंशन दी 2 लाख सालाना
18 साल विधवा रहकर शायरी करती रहीं, जहाँगीर की कब्र पर रोज फूल।

मरते वक्त कहा:
“बर मज़ारे मा गरीबाँ ने चिराग़े ने गुली, ने परे परवाना सोज़द ने सदाए बुलबुली”
मतलब: मेरी गरीब कब्र पर न दिया जले न फूल चढ़े, न परवाना आए न बुलबुल गाए

जहाँगीर ने नहीं देखा “विधवा-बीमार”, देखा “मेहर है”
नूरजहाँ ने नहीं देखा “शराबी बादशाह”, देखा “मेरा जहाँ”
दिमाग धनी हुआ तो तख्त भी धनी

2. “Struggle is pillars”
बीमारी, बदनामी, नजरबंदी – यही नूरजहाँ के खंभे बने।
इन्हीं से वो “बादशाह बेगम” बनी

3. “इश्क़ = नाम”
सूफी कहते हैं: “इश्क़ मजाज़ी इश्क़ हकीकी तक ले जाता है”
मतलब: दुनिया का इश्क़ ही खुदा के इश्क़ का रास्ता है।
जहाँगीर-नूरजहाँ ने एक-दूसरे में खुदा देखा

जब जहांगीर को महावत खान द्वारा बंदी बना लिया गया था, तब नूरजहां ने अपनी कूटनीति और साहस से अपने पति को मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी。 
कला और संस्कृति
नूरजहां की कला, वास्तुकला और साहित्य में गहरी रुचि थी。 उन्होंने ही अपने माता-पिता के सम्मान में आगरा में प्रसिद्ध ‘इतिमाद-उद-दौला का मकबरा’ बनवाया था, जो पित्रा-दूरा (Pietra dura) शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इश्क़ का मजहब एक ही है – “वफा”

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