उड़ीसा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर ब्लॉक में स्थित ‘रेमांडा’ (Remanda) गांव सांप्रदायिक सद्भाव और मिसाल के रूप में जाना जाता है, जहाँ एक मुस्लिम परिवार 100 से अधिक वर्षों से रथ सेवा (छेरा पाहनरा) का मुख्य अनुष्ठान और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं

इस अनूठी परंपरा के बारे में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
परंपरा की शुरुआत: ब्रिटिश काल के दौरान, गांव के तत्कालीन मुस्लिम मुखिया (गोंटिया) वारिस मोहम्मद और मसूद अली को अंग्रेजों द्वारा रथ यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
छेरा पाहनरा अनुष्ठान: आज भी इसी परिवार के मोहम्मद जमील-उल-लाह, जो गांव के वर्तमान गोंटिया (प्रमुख) हैं, रथों के सामने ‘छेरा पाहनरा’ (झाड़ू लगाने की रस्म) करते हैं।

सामुदायिक भागीदारी: इस गांव में रथ यात्रा (जो मुख्य रथ यात्रा के कुछ दिनों बाद होती है) के दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय एक साथ मिलकर रथ खींचते हैं और त्योहार मनाते हैं। यह परंपरा पिछले 120 से अधिक वर्षों से चली आ रही है।












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