आज का भगवद् चिन्तन
11 जुलाई 2026
|| स्वभाव को मधुर बनायें ||
जिसका स्वभाव मधुर है, उसका जीवन भी मधुर बन जाता है। स्वभाव की मधुरता ही जीवन को सुखमय बनाती है। अच्छा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल में उतार देता है तो बुरा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल से भी उतार देता है। इसलिए अपने स्वभाव को मृदु बनाओ ताकि आपका पूरा जीवन मधुरता से भर सके। आज मनुष्य दु:खी रहता है क्योंकि वो मकान, शहर, देश, मित्र, संबंध सब कुछ बदलता है, लेकिन अपना स्वभाव नहीं बदल पाता।
जीवन की सत्यता तो ये है, कि अपने स्वभाव से ही आदमी सुखी और दुःखी बनता है। अच्छा स्वभाव सुंदरता की कमी को भी पूरा कर देता है पर अच्छे स्वभाव की कमी हो तो सुंदरता से उसकी पूर्ति कभी नहीं की जा सकती है। चेहरे की सुंदरता तो प्रकृति पर निर्भर होती है और स्वभाव की सुंदरता आपकी प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। चेहरे की सुंदरता जहाँ केवल आँखों में उतर पाती है, वहीं स्वभाव की सुंदरता दूसरों के दिल तक उतर जाती है।
_जीवन जीने की कला
🕉️केवल मानव जन्म मिल जाना ही पर्याप्त नहीं है अपितु हमें जीवन जीने की कला आनी भी आवश्यक है। पशु- पक्षी तो बिल्कुल भी संग्रह नहीं करते फिर भी भी उन्हें इस प्रकृति द्वारा जीवनोपयोगी सब कुछ प्राप्त हो जाता है।
🕉️आनन्द साधन से नहीं साधना से प्राप्त होता है। आंनद भीतर का विषय है, तृप्ति आत्मा का विषय है। मन को कितना भी मिल जाए , यह अपूर्णता का बार - बार अनुभव कराता रहेगा।
🕉️जीवन तो बड़ा आनंदमय है लेकिन हम अपनी इच्छाओं के कारण, अपनी वासनाओं के कारण इसे कष्टप्रद और क्लेशमय बनाते हैं। केवल संग्रह के लिए जीने की प्रवृत्ति ही जीवन को कष्टमय बनाती है।
अभाव में स्वभाव बदल जाना स्वाभाविक है। मन में कचरा और कुविचार दूर नहीं होंगे तब तक कोई उपदेश काम नहीं करेंगे, यदि मन में कचरा और कुविचार नहीं है, वहाँ कोई उपदेश सुनने की जरूरत ही नहीं है। जीवन में ऐसी कोई मंजिल नहीं जहां पहुंच कर सारे संघर्ष समाप्त हो जाएं, हर उपलब्धि अपने साथ एक नई परीक्षा लेकर आती है। न रुकना है न थकना है, बस चलते रहना है।












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