खोज // सिंधु सभ्यता के बारे में सबसे पहले दुनिया को 1920 के दशक में पता चला। जब सर जॉन मार्सल ब्रिटिश भारतीय जो लाहौर रेलवे ट्रैक बन रहा थे

Spread the love

सिंधु सभ्यता के बारे में सबसे पहले दुनिया को 1920 के दशक में पता चला

लेकिन इसकी कहानी थोड़ी लंबी है:

1. पहली बार देखना – 1856

  • अलेक्जेंडर कनिंघम और ब्रिटिश रेलवे के इंजीनियरों ने लाहौर-मुल्तान रेलवे लाइन बनाते वक्त हड़प्पा के टीले से ईंटें उखाड़ लीं।
  • उन्हें नहीं पता था कि ये 4500 साल पुराना शहर है। वो समझे ये बस पुराना किला है।
  • कनिंघम ने 1875 में हड़प्पा से मिली एक मुहर का स्केच भी छापा, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

2. असली खोज – 1921-1922

  • दयाराम साहनी ने 1921 में हड़प्पा की खुदाई शुरू की।
  • आर.डी. बनर्जी ने 1922 में मोहनजो-दड़ो की खुदाई शुरू की।
  • जब दोनों जगह से एक जैसी मुहरें, बर्तन, और ईंटों के शहर मिले, तो पता चला ये कोई अनजान सभ्यता है।

3. दुनिया को घोषणा – 1924

  • सर जॉन मार्शल, जो तब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के डायरेक्टर जनरल थे, ने 1924 में आधिकारिक तौर पर घोषणा की:
Oplus_131072

“हमने भारत में मिस्र और मेसोपोटामिया जैसी ही पुरानी सभ्यता खोज ली है।”

  • उन्होंने इसे “Indus Valley Civilization” नाम दिया क्योंकि ज्यादातर साइटें सिंधु नदी के किनारे थीं।

4. क्यों देर से पता चला?

  • हड़प्पा के लोग मरे हुए को दफनाते थे, बड़े मंदिर नहीं बनाते थे। इसलिए ऊपर से देखने पर सिर्फ मिट्टी का टीला लगता था।
  • उनकी लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी, तो कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं मिला।
  • 1857 के बाद ब्रिटिश सिर्फ ग्रीक-रोमन और वैदिक इतिहास पर ध्यान दे रहे थे।

संक्षेप में:

  • पहला संकेत: 1856 में रेलवे इंजीनियरों को
  • असली खुदाई: 1921-22 में दयाराम साहनी और आर.डी. बनर्जी ने
  • घोषणा: 1924 में सर जॉन मार्शल ने

आज हम इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं, क्योंकि हड़प्पा सबसे पहले खुदी गई थी।

सिंधु सभ्यता का अंत एक ही कारण से नहीं हुआ। ये धीरे-धीरे 1900 BCE के आसपास कमज़ोर पड़कर खत्म हो गई। पुरातत्व और जलवायु के सबूतों से 4 मुख्य कारण सामने आते हैं:

1. जलवायु परिवर्तन और नदियों का सूखना

  • सबसे बड़ा कारण माना जाता है मानसून का कमज़ोर पड़ना
  • सरस्वती/घग्गर-हाकरा नदी, जो सभ्यता की रीढ़ थी, धीरे-धीरे सूख गई।
  • पानी की कमी से खेती गिर गई और शहर खाली होने लगे।
  • हाल के ड्रिलिंग डेटा दिखाते हैं कि 2200-1900 BCE के बीच इलाके में बारिश 30-50% कम हो गई थी।

2. भू-वैज्ञानिक बदलाव

  • टेक्टोनिक हलचल से नदियों का रास्ता बदल गया।
  • सिंधु नदी पश्चिम की तरफ खिसक गई।
  • कुछ शहरों में बाढ़ के सबूत भी मिले हैं, जैसे मोहनजो-दड़ो।

3. व्यापार का टूटना

  • सिंधु सभ्यता का मेसोपोटामिया, ईरान से बड़ा व्यापार था।
  • जब मेसोपोटामिया में उर सभ्यता गिरी, तो व्यापार ठप हो गया।
  • शहरों को चलाने के लिए जरूरी तांबा, टिन, लापिस लाजुली मिलना बंद हो गया।

4. आंतरिक कमज़ोरी और पलायन

  • शहरों में योजना और सफाई व्यवस्था बिगड़ गई।
  • लोग बड़े शहर छोड़कर छोटे गांवों और पूर्व में गंगा-यमुना के इलाके में चले गए।
  • ये लोग ही बाद में वैदिक संस्कृति में घुल-मिल गए।

क्या आर्यों का आक्रमण कारण था?

पुराने जमाने में कहा जाता था कि आर्यों ने हमला करके सभ्यता खत्म कर दी। लेकिन अब ज्यादातर पुरातत्वविद् मानते हैं कि कोई बड़ा आक्रमण नहीं हुआ। मोहनजो-दड़ो से मिले कंकालों पर युद्ध के निशान बहुत कम हैं। शहर धीरे-धीरे खाली हुए, जले या लूटे नहीं गए।


नतीजा: 1900 BCE तक हड़प्पा, मोहनजो-दड़ो जैसे बड़े शहर उजड़ गए। लेकिन लोग पूरी तरह खत्म नहीं हुए। वो पूर्व और दक्षिण की तरफ चले गए और भारत की अगली सभ्यताओं की नींव बने।

Oplus_131072

हड़प्पा के लोग “गायब” नहीं हुए। वो धीरे-धीरे शहर छोड़कर चले गए और भारत की अगली सभ्यताओं में घुल-मिल गए। DNA और पुरातत्व दोनों यही बताते हैं।

1. लोग कहां गए?

दो मुख्य दिशाएं थीं:

पूर्व और दक्षिण की तरफ:

  • घग्गर-हाकरा और सिंधु सूखने के बाद लोग गंगा-यमुना के दोआब और मध्य भारत की तरफ चले गए।
  • पुरातत्व में इसे “लेट हड़प्पन” और “पेंटेड ग्रे वेयर” संस्कृति कहते हैं।
  • यही लोग बाद में वैदिक संस्कृति के साथ मिलकर भारत की शास्त्रीय सभ्यता बने।

दक्षिण भारत की तरफ:

  • गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक में हड़प्पा जैसी मिट्टी के बर्तन, मुहरें मिली हैं।
  • कई इतिहासकार मानते हैं कि द्रविड़ भाषी समुदाय हड़प्पा से ही जुड़े थे।

2. DNA क्या कहता है?

2015-2019 में राखीगढ़ी, हड़प्पा, शोरटुघई से मिले कंकालों का DNA निकाला गया।

मुख्य निष्कर्ष:
बात क्या पता चला
हड़प्पा के लोगों का DNA उनका DNA “दक्षिण एशियाई शिकारी-संग्राहक” + “ईरानी किसान” के मिश्रण से बना था। इसे “ANI + ASI” का पूर्वज रूप कह सकते हैं।
स्टेप/आर्य DNA हड़प्पा के DNA में स्टेप मैदानी इलाकों का DNA लगभग नहीं था।
आज के भारतीय आज के उत्तर भारतीयों में 15-30% स्टेप DNA मिला, जो 2000-1500 BCE के आसपास आया। दक्षिण भारतीयों में ये बहुत कम है।
निष्कर्ष हड़प्पा के लोग खत्म नहीं हुए। उनके वंशज आज भी भारत में हैं। बस 1500 BCE के बाद बाहर से थोड़ा मिश्रण हुआ।

3. सरल भाषा में समझें

सोचो जैसे कोई बड़ा शहर बंद हो जाए तो लोग छोटे-छोटे कस्बे और गांव में बस जाते हैं।
हड़प्पा के साथ भी यही हुआ।

  • शहर खत्म हुए, पर लोग नहीं।
  • उनकी खेती, शिल्प, भाषा, देवी-देवता की परंपरा धीरे-धीरे वैदिक और द्रविड़ संस्कृति में मिल गई।
  • आज भारत में जो “हड़प्पा वाला DNA” है, वो खासकर दक्षिण भारतीय और कुछ आदिवासी समुदायों में सबसे ज्यादा मिलता है।

हड़प्पा के लोग नष्ट नहीं हुए, वो बिखरकर भारत का हिस्सा बन गए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *