ईश्वर की ये बात हमें यही सिखाती है कि हमें अपने कर्मों का फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, बस अपना काम करते रहना चाहिए सेवा एक जग कीजिए फल लेकिन दूसरी जगह पर मिलना ही मिलना है

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ईश्वर की ये बात हमें यही सिखाती है कि हमें अपने कर्मों का फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, बस अपना काम करते रहना चाहिए। जैसे पानी का एक जग भरकर दूसरे जग में डालने से पानी बढ़ता नहीं, लेकिन अगर हम दूसरों की सेवा करते हैं तो उसका फल हमें आगे चलकर जरूर मिलता है।
इंसान की यही तो कमजोरी है। वो तुरंत फल की इच्छा करता है, लेकिन ईश्वर की योजना कुछ और ही होती है। जैसे एक किसान बीज बोता है, तो वो तुरंत फल नहीं मिलता, लेकिन समय आने पर फसल तैयार हो जाती है।
जिस दिन इंसान समझ लेगा कि संसार एक माया है, उस दिन से उसके जीवन में एक बड़ा परिवर्तन जरूर आएगा। वो अपने आसपास की चीजों को एक नए दृष्टिकोण से देखने लगेगा, और उसके जीवन में शांति और संतुष्टि की भावना आ जाएगी।
भले ही देर हो जाए। जैसे एक दीपक दूसरे दीपक को जलाता है, वैसे ही हमारी सेवा दूसरों के जीवन में रोशनी लाती है, और उसका फल हमें जरूर मिलता है। सेवा करना हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए?

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