सिंधु सभ्यता को ही सिंधु सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता कहा जाता है, जिसे दुनिया की सबसे पुरानी और विकसित सभ्यताओं में से एक माना जाता है। यह सभ्यता लगभग 4300-1300 ईसा पूर्व के बीच अस्तित्व में थी, और इसका केंद्र वर्तमान पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों में था।
सिंधु सभ्यता को “सिद्ध सभ्यता” कहा जाता है क्योंकि:
- योजनाबद्ध शहर: सिंधु सभ्यता के शहर बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से बनाए गए थे, जिसमें पक्की सड़कें, नालियां, और घर थे।
- विकसित जल प्रबंधन: सिंधु सभ्यता में जल प्रबंधन की व्यवस्था बहुत ही उन्नत थी, जिसमें नहरें, बांध, और जलाशय थे।
- लेखन प्रणाली: सिंधु सभ्यता में एक विकसित लेखन प्रणाली थी, जिसे अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है।
- व्यापार और वाणिज्य: सिंधु सभ्यता में व्यापार और वाणिज्य बहुत ही विकसित था, जिसमें वे अन्य सभ्यताओं के साथ व्यापार करते थे।
इन विशेषताओं के कारण, सिंधु सभ्यता को “सिद्ध सभ्यता” कहा जाता है।

सिंधु सभ्यता में सूर्य और चंद्र की पूजा के बारे में कुछ संकेत हैं जो इस ओर इशारा करते हैं। सिंधु सभ्यता के लोग प्राकृतिक तत्वों जैसे जल, पृथ्वी, और कृषि से संबंधित देवताओं की पूजा करते थे। वे मातृ देवी की पूजा भी करते थे, जिसे ‘मातृका’ कहा जाता था
सिंधु सभ्यता के स्थलों पर पाए गए कुछ प्रतीकों और चित्रों में सूर्य और चंद्र के चिह्न दिखाई देते हैं, लेकिन इनकी व्याख्या अलग-अलग विद्वानों द्वारा अलग-अलग की गई है। कुछ विद्वानों का मानना है कि ये प्रतीक सूर्य और चंद्र की पूजा को दर्शाते हैं, जबकि अन्य इसे प्रकृति की शक्तियों के प्रतीक मानते हैं
सिंधु सभ्यता की धार्मिक आस्था प्रकृति के प्रति गहरी थी, और वे विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा करते थे।

सिंधु सभ्यता में पक्की सड़कें और पक्के मकान भी थे! यह एक बहुत ही विकसित और आधुनिक सभ्यता थी। सिंधु सभ्यता के शहरों में पक्की सड़कें, नालियां, और घरों में पानी की व्यवस्था थी। घरों में कई कमरे होते थे, और वे पक्की ईंटों से बने होते थे।
मोहनजोदड़ो और हरप्पा जैसे शहरों में पक्की सड़कें और नालियां थीं, जो उस समय के लिए बहुत ही उन्नत थीं। घरों में स्नानागार और शौचालय भी थे, जो उस समय के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।
सिंधु सभ्यता की यह विशेषता है कि उन्होंने अपने शहरों को बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से बनाया था, जो उस समय के लिए बहुत ही उन्नत था।
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