नमस्ते की उत्पत्ति के बारे में कुछ मतभेद जरूर हैं, लेकिन यह माना जाता है कि इसकी शुरुआत वैदिक काल में हुई थी, लगभग 1500 ईसा पूर्व। यह एक पारंपरिक भारतीय अभिवादन है, जिसमें हाथ जोड़कर नमस्ते कहना शामिल है।
संस्कृत भाषा में “नमस्ते” शब्द का उपयोग वैदिक काल से ही होता आ रहा है, लगभग 1500 ईसा पूर्व। यह एक पारंपरिक अभिवादन है, जिसका अर्थ है “मैं आपको नमस्कार करता हूँ” या “आपको मेरा प्रणाम”।
संस्कृत स्कूल में नमस्ते बोलना एक पारंपरिक प्रथा है, जो गुरु-शिष्य परंपरा का एक हिस्सा है। जब छात्र गुरु के पास जाते हैं, तो वे नमस्ते कहकर उनका अभिवादन करते हैं और गुरु भी नमस्ते कहकर उत्तर देते हैं।
तो कह सकते हैं कि संस्कृत स्कूल में नमस्ते बोलना एक पारंपरिक प्रथा है, जो वैदिक काल से चली आ रहा है

संस्कृत में “नमस्ते” शब्द का अर्थ है “मैं आपको नमस्कार करता हूँ” या “आपको मेरा प्रणाम”, जो सम्मान और आदर का प्रतीक है। यह प्रथा न केवल भारत में, बल्कि अन्य प्राचीन सभ्यताओं में भी देखी जाती है, जैसे कि प्राचीन ग्रीक और रोमन सभ्यताओं में।
तो कह सकते हैं कि मानव जगत में सम्मान देना-लेना एक प्राचीन प्रथा है, जो वैदिक काल से ही चली आ रही है और आज भी महत्वपूर्ण है।
आज भी नमस्ते बोलना एक महत्वपूर्ण प्रथा है, जो भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा है। यह एक पारंपरिक अभिवादन है, जो सम्मान और आदर का प्रतीक है।
आज भी, जब हम किसी से मिलते हैं, तो नमस्ते कहकर उनका अभिवादन करते हैं। यह एक सरल और सुंदर तरीका है, जो हमें एक दूसरे के प्रति सम्मान और आदर दिखाने में मदद करता है।
नमस्ते बोलना न केवल एक अभिवादन है, बल्कि यह एक संस्कृति है, जो हमें एक दूसरे के प्रति जुड़ने और सम्मान करने की शिक्षा देती है।
तो चलिए, हम भी नमस्ते बोलना जारी रखें और एक दूसरे के प्रति सम्मान और आदर दिखाएं!












Leave a Reply