शुभ दीपावली
जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाने के लिए ज्ञान रूपी दीपक जलाना ही एकमात्र उपाय है।
अज्ञान एवं असत्य की कालिमा के विनाश के लिए ज्ञान एवं सत्य रूपी दीपक के प्रकाश से जीवन को प्रकाशित करने का पावन पर्व ही दीपावली है।
काम-क्रोध-लोभ और मोह जैसी घनघोर अमावस में ज्ञान रुपी दीप प्रज्वलित कर भीतर के तम का नाश करना ही इस पावन पर्व का मुख्य उद्देश्य है।
जहाँ प्रेम एवं श्रद्धा रूपी दीये जले हों, प्रभु श्रीराम उसी हृदय रुपी अयोध्या में विराजते हैं। हृदय सिंहासन पर धर्म के विग्रह स्वरूप श्रीराम के विराजमान होने पर मनुष्य के भीतर स्वतः ही सत्य, प्रेम एवं करुणा का प्रकाश फैलने लगता है।
इस दीपावली पर मिठाई ही नहीं, प्रेम भी बाँटें, पटाखे ही नहीं, दुर्गुणों को भी जलायें और केवल घर को ही नहीं, सुविचारों से हृदय को भी सजायें। हमारे जीवन में धर्म रुपी नारायण होंगे तो सुख-समृद्धि रूपी माँ लक्ष्मी का स्वतः आगमन हो जायेगा।
प्रकाशोत्सव दीपावली आप सभी के लिए शुभ एवं मंगलमय हो।
जय श्री राधे कृष्ण















