भूतकाल में जो घटना हो गई, सो हो गई। अब उस पर पछताना क्या? “क्योंकि उसे आप बदल तो सकते नहीं। इसलिए उसको बिना पछताए स्वीकार करने में ही बुद्धिमत्ता है।”
“और जो आज आपका वर्तमान है, इसको पूरे आत्मविश्वास के साथ जीयें। अर्थात अच्छे काम करें। ईश्वर आपको उनका उत्तम फल देगा।”
“और आने वाले कल का आपका भविष्य भी उत्तम ही होगा। क्योंकि आपने जब आज सब काम अच्छा ही किया है, तो फिर चिंता किस बात की? इस तरह निर्भय होकर आने वाले कल का स्वागत करें।”
“बस, यही संसार में प्रसन्नता से जीने की पद्धति है। जो व्यक्ति इस प्रकार से अपना जीवन जीता है। वह स्वयं सदा प्रसन्न रहता है, और दूसरों को भी प्रसन्नता देता है।”
—- “स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक – दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात.”















