रानी सबराई
दस्तावेजों के अनुसार, उन्होंने गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा की हिंदू पत्नी के रूप में 1514 ईस्वी (920 AH) में इस मस्जिद और अपने मकबरे का निर्माण शुरू करवाया था。
अहमदाबाद के अस्तोडिया गेट के पास स्थित इस मस्जिद को रानी सिपरी की मस्जिद (Rani Sipri’s Mosque) के नाम से जाना जाता है。 इसे अपनी उत्कृष्ट नक्काशी के कारण ‘मस्जिद-ए-नगिना’ (रत्न मस्जिद) भी कहा जाता है。

रानी सबराई (इन्हें रानी सिपरी भी कहा जाता है) गुजरात सल्तनत के सुल्तान महमूद बेगड़ा की हिंदू पत्नी थीं。 उन्होंने 1514 ईस्वी में अहमदाबाद में अपनी बेमिसाल ‘रानी सिपरी मस्जिद’ (मस्जिद-ए-नगीना) का निर्माण करवाया था。 यह मस्जिद हिंदू और इस्लामी वास्तुकला के अनूठे मिश्रण और नक्काशीदार पत्थर की जाली के लिए जानी जाती है。
अहमदाबाद में स्थित रानी सबराई मस्जिद (रानी सिपरी नी मस्जिद) से जुड़े प्रमुख आकर्षणों का विवरण इस प्रकार है:
ऐतिहासिक महत्व: 1514 ईस्वी में सुल्तान मुजफ्फर शाह द्वितीय के शासनकाल के दौरान रानी सबराई द्वारा इस मस्जिद का निर्माण करवाया गया था。
वास्तुकला (Architecture): यह इमारत अपनी विस्तृत नक्काशी, पतली मीनारों और जटिल पत्थर के जालीदार काम के लिए विश्व प्रसिद्ध है。 इसे ‘मस्जिद-ए-नगीना’ (मस्जिदों का रत्न) भी कहा जाता है。
रानी का मकबरा: मुख्य मस्जिद के ठीक सामने पूर्वी दिशा में रानी सबराई (सिपरी) का मकबरा स्थित है, जिसे बेहद आकर्षक ढंग से पत्थरों की जाली से उकेरा गया है。
स्थान: यह विश्व धरोहर शहर, अहमदाबाद (गुजरात) के अस्तोदिया क्षेत्र में स्थित है












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