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हम को कौन चला रहा है

अर्थात मनुष्य का शरीर और जीवन को मुख्य रूप से हमारे भीतर का मस्तिष्क (Brain), हमारा तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और हमारी सोचने की क्षमता चला रही है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह एक जटिल जैविक मशीन है जिसे हमारा दिमाग और हमारी इच्छाशक्ति नियंत्रित करती है।
इस विषय को और गहराई से समझने के लिए आप इसे तीन मुख्य हिस्सों में देख सकते हैं:
जैविक नियंत्रण (Biological Control): हमारे शरीर के सारे अंग, सांस लेना, दिल की धड़कन और कोशिकाएं—मस्तिष्क से जुड़े नर्वस सिस्टम (Nervous System) और हार्मोन्स द्वारा संचालित होते हैं। National Institutes of Health के अनुसार, सेंट्रल नर्वस सिस्टम ही शरीर का मुख्य कंट्रोल सेंटर है।
मानसिक नियंत्रण (Mental Control): हम क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कैसे निर्णय लेंगे, यह हमारी चेतना, अनुभवों और यादों पर निर्भर करता है।
दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Philosophical View): अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों में यह माना जाता है कि मानव जीवन को शरीर के अलावा एक अदृश्य ऊर्जा, आत्मा, या ईश्वर (Nature) चला रही है।
वेदों, गीता जी आदि पवित्र सद्ग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तथा वर्तमान के नकली संत, महंत व गुरुओं द्वारा भक्ति मार्ग के स्वरूप को बिगाड़ दिया गया होता है। फिर परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परमज्ञानी संत को भेज कर सच्चे ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनः स्थापना करता है। वह भक्ति मार्ग को शास्त्रों के अनुसार समझाता है। उसकी पहचान होती है कि वर्तमान के धर्म गुरु उसके विरोध में खड़े होकर राजा व प्रजा को गुमराह करके उसके ऊपर अत्याचार करवाते हैं। कबीर साहेब जी अपनी वाणी में कहते हैं कि

जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके संग सभि राड़ बढ़ावै । या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी ।।

कबीर साहेब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को इस वाणी में ये समझा रहे हैं कि जो मेरा संत सत भक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी संत व महंत झगड़ा करेंगे ये उसकी पहचान होगी।

दूसरी पहचान वह संत सभी धर्म ग्रंथों का पूर्ण जानकार होता है। प्रमाण

सतगुरु गरीबदास जी की वाणी में –

“सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद चार वेद षट शास्त्र कहै अठारा बोध ।। ” सतगुरु गरीबदास जी महाराज अपनी वाणी में पूर्ण संत की पहचान बता रहे हैं कि वह चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा अर्थात् उनका सार निकाल कर बताएगा। यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पुरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताएगा वह जगत का उपकारक संत होता है।

वेदों में गुरु को ही सर्वोपरि बताया गया है,

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