बिहार के वैशाली जिले के एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में एक बुज़ुर्ग आदमी हाथ में डंडा और चप्पल लिए कोर्ट परिसर से बाहर निकलता हुआ दिख रहा है. वह अपनी सजा सुनने के लिए कोर्ट में जा रहा है, जहां 34 साल बाद उसे एक पुराने मामले में दोषी ठहराया गया है. बुज़ुर्ग आदमी की उम्र 85 साल है.
लाठी से टेकते, चप्पल हाथ में लिए अदालत में था पहुंचा
वीडियो में साफ तौर पर देखा जा रहा है कि बुजुर्ग का शरीर साथ नहीं दे रहा है. उसे उठने बैठने के लिए भी दो लोगों की जरूरत पड़ रही है. लेकिन कानून का डंडा जब चला तो उम्र की लाचारी भी काम नहीं आ रही है. “
बुजुर्ग अब ठीक से चलने में असमर्थ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तस्वीर में दिख रहे बुजुर्ग का शरीर अब पूरी तरह साथ छोड़ चुका है। उनके पास न तो ठीक से चलने की हिम्मत है और न ही बैठने की। दो-दो लोग जब उन्हें सहारा देते हैं, तब जाकर वो कहीं बैठ पाते हैं। मौत कभी भी उनके दरवाजे पर दस्तक दे सकती है, लेकिन जवानी के दिनों में किए गए एक जघन्य अपराध ने आज उनके बुढ़ापे को नर्क बना दिया है।
करीब 33 साल पुराने मामले में सजा
दरअसल, यह पूरा मामलाबिहार में वैशाली जिले के राघवपुर गांव का है। आज के करीब 33 साल पहले 10 नवबंर 1992 की सुबह, अदालत राय नाम के व्यक्ति अपनी पत्नी रामशकी देवी के साथ अपने घर के दरवाजे पर बैठे थे। तभी दीप राय नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचा और रास्ते पर कांच के टुकड़े बिछाने लगा। जब अदालत राय और उसकी पत्नी ने इसका विरोध किया तो दीप राय और उसके परिवार ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
10 गवाहों की कराई गई गवाही
इस मामले में 13 मार्च 1993 को पुलिस की ओर से आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया। 17 जून 1999 को आरोपियों के खिलाफ अदालत ने आरोप तय किए। इस मामले में कुल 10 गवाहों की गवाही कराई गई। लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान इस केस के 4 आरोपियों की मौत हो गई।












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