जनगणना 2027 में संस्कृत का उल्लेख करें, राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाएं : महंत रोहित शास्त्री।
देववाणी संस्कृत के संरक्षण हेतु जनगणना में सही भाषा विवरण देने का आह्वान
जम्मू कश्मीर : श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ने कहा है कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की सांस्कृतिक, भाषिक और सामाजिक पहचान का सबसे महत्त्वपूर्ण आधार भी है। भारत की प्राचीन ज्ञानपरम्परा, वैदिक संस्कृति तथा देववाणी संस्कृत हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि संस्कृत केवल किसी एक वर्ग या परम्परा की भाषा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति की आत्मा है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, योग तथा भारत की समृद्ध वैज्ञानिक और आध्यात्मिक परम्परा का मूल स्रोत संस्कृत ही है। यदि हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त बनाए रखना है, तो संस्कृत के प्रति सामाजिक जागरूकता और व्यवहारिक स्वीकार्यता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि जब वर्ष 2027 की जनगणना के दौरान अधिकारी घर-घर जानकारी लेने आएँ, तब भाषा संबंधी विवरण में निःसंकोच संस्कृत का उल्लेख करें। “मम भाषा संस्कृतम्” तथा “अस्माकं भाषा संस्कृतम्” कहकर प्रत्येक नागरिक संस्कृत संरक्षण के राष्ट्रीय अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकता है।
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि जनगणना में संस्कृत का सही और व्यापक उल्लेख केवल भाषा की संख्या बढ़ाने का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक अस्मिता, आध्यात्मिक परम्परा और ज्ञान-विज्ञान की गौरवशाली विरासत को सशक्त करने का माध्यम बनेगा। इससे आने वाली पीढ़ियों में संस्कृत के प्रति सम्मान, अध्ययन और व्यवहारिक उपयोग की भावना भी विकसित होगी।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में विश्वभर में भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और सनातन ज्ञान के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। ऐसे समय में संस्कृत भाषा का पुनर्जागरण भारत के सांस्कृतिक नेतृत्व को और अधिक सुदृढ़ करेगा। संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का आधार है।
श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट आगामी समय में जनगणना 2027 को लेकर संस्कृत जागरण हेतु विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग संस्कृत के महत्त्व को समझें और जनगणना में उसका उल्लेख करने के लिए प्रेरित हों।
अंत में महंत रोहित शास्त्री ने सभी संस्कृतप्रेमियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से इस जन-जागरण अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा—
“आइए, जनगणना 2027 को संस्कृत जागरण का जन-अभियान बनाएं और अपनी देववाणी संस्कृत को राष्ट्रीय चेतना के केंद्र में स्थापित करें।”












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