विचार संजीवनी//घड़ी की सुईयो की तरह जीवन में अपने रिश्तों को बनाए रखें…कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई तेज है और कोई धीमा…मायने रखता है जुडे रहना…

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घड़ी की सुईयो की तरह जीवन में अपने रिश्तों को बनाए रखें…
कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई तेज है और कोई धीमा…
मायने रखता है जुडे रहना…

 विचार संजीवनी

अभाव हमारी लगन का है

कल्याण न गुरु से होता है और न ईश्वर से ही होता है, प्रत्युत हमारी सच्ची लगन से होता है। खुद की लगन के बिना भगवान् भी कल्याण नहीं कर सकते। अगर कर देते तो हम आज तक कल्याण से वंचित क्यों रहते ?

न तो गुरु का अभाव है, न सन्त-महात्माओं का अभाव है और न भगवान् का ही अभाव है। अभाव हमारी लगन का है। कल्याण की प्राप्ति न गुरु के अधीन है, न सन्त-महात्माओं के अधीन है और न भगवान् के अधीन है। यह तो स्वयं के ही अधीन है।

जब हमारी लगन के बिना सर्वशक्तिमान् भगवान् भी हमारा कल्याण नहीं कर सकते तो फिर मनुष्य में कितनी शक्ति है कि हमारा कल्याण कर दे ? हमारी लगन नहीं होगी तो लाखों-करोड़ों गुरु बना लें तो भी कल्याण नहीं होगा।

राम ! राम !! राम !!!

परम् श्रद्धेय स्वामी जी श्रीरामसुखदास जी महाराज साधन-सुधा-निधि पृष्ठ २९३

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