गौतम बुद्ध //जीवन में दो तरह के लोग कभी सफल नहीं होते

Spread the love

जीवन में दो तरह के लोग कभी सफल नहीं होते: एक जो सोचते तो हैं, लेकिन करते नहीं; और दूसरे जो करते हैं, पर सोचते नहीं (बिना सोचे-समझे काम करना). यह विचार गौतम बुद्ध (Buddha) से जुड़ा है, जो जीवन में कर्म और विचार के सही संतुलन के महत्व पर जोर देते हैं.
विस्तार से:
सोचकर काम न करने वाले: ये लोग बड़ी-बड़ी योजनाएँ बनाते हैं, लेकिन उन्हें अमल में नहीं लाते. टालमटोल के कारण उनके विचार अधूरे रह जाते हैं और वे असफल हो जाते हैं.
बिना सोचे-समझे काम करने वाले: ये लोग तुरंत काम शुरू कर देते हैं, लेकिन दिशाहीन होते हैं. बिना योजना और विचार के किए गए काम अक्सर गलत दिशा में जाते हैं और उन्हें सफलता नहीं मिलती.
संक्षेप में, सफलता के लिए सोचना (योजना बनाना) और फिर उस पर सही ढंग से अमल करना (कर्म करना), दोनों ही ज़रूरी हैं. इन दोनों में से किसी एक को भी छोड़ना असफलता का कारण बन सकता है.


बुद्ध के 8 नियम,

जिन्हें आर्य अष्टांगिक मार्ग कहा जाता है, आत्मज्ञान (निर्वाण) प्राप्त करने और दुखों से मुक्ति पाने का मार्ग हैं, जिसमें सही दृष्टि, सही संकल्प, सही वाणी, सही कर्म, सही आजीविका, सही प्रयास, सही स्मृति (जागरूकता) और सही समाधि (एकाग्रता) शामिल हैं; यह मार्ग बुद्धि (प्रज्ञा), आचरण (शील) और एकाग्रता (समाधि) श्रेणियों में बँटा है।
अष्टांगिक मार्ग के आठ अंग:
सम्यक् दृष्टि चार आर्य सत्यों (दुःख, दुःख का कारण, दुःख का अंत, और दुःख के अंत का मार्ग) को सही से समझना और मानना।
सम्यक् संकल्प

पवित्र, निस्वार्थ और दयालु विचार रखना, हिंसा, द्वेष और गलत इरादों से दूर रहना।
सम्यक् वाक्

झूठ, कठोर वचन, चुगली और व्यर्थ की बातों से बचना; सत्य, मधुर और उपयोगी बोलना।
सम्यक् कर्म

हत्या, चोरी और व्यभिचार जैसे गलत कामों से बचना; सही और नैतिक कार्य करना।
सम्यक् आजीविका

ऐसा पेशा चुनना जिससे किसी को नुकसान न हो और जो नैतिक हो, जैसे कि हिंसा या धोखे से जुड़ा काम न करना।
सम्यक् व्यायाम बुरे विचारों को रोकना और अच्छे विचारों को उत्पन्न करने और बनाए रखने के लिए प्रयास करना।
सम्यक् स्मृति शरीर, भावनाओं, मन और विचारों के प्रति जागरूक रहना।
सम्यक् समाधि ध्यान के माध्यम से मन को एकाग्र करना और मानसिक शांति प्राप्त करना।
इन नियमों का महत्व:
ये नियम आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हें एक साथ अभ्यास किया जाता है, न कि किसी खास क्रम में। इनका उद्देश्य इच्छाओं को छोड़ना और निर्वाण (पूर्ण शांति) प्राप्त करना है। यह मार्ग जीवन में सदाचार, अनुशासन और ज्ञान विकसित करने का एक व्यावहारिक तरीका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *