जब यदुवंश के विनाश का समय निकट आया और द्वारका में अपशकुन होने लगे, तब श्रीकृष्ण के सामने ही उनके दिव्य अस्त्र और रथ गायब होने लगे थे
अंत समय की मुख्य घटनाएँ
सुदर्शन चक्र का जाना
यदुवंशियों के आपसी गृहयुद्ध के समय, श्रीकृष्ण और सभी यादवों के देखते-देखते सुदर्शन चक्र अचानक आकाश में चला गया और अदृश्य हो गया। चूंकि वह भगवान विष्णु का ही शाश्वत अंश और दिव्य अस्त्र है, इसलिए लीला समाप्त होने के संकेत के रूप में वह अपने मूल लोक (वैकुंठ) वापस लौट गया।
रथ और अन्य अस्त्रों का अंत
श्रीकृष्ण के रथ (दारुक रथ) के घोड़े उसे समुद्र के ऊपर से ले उड़े। साथ ही श्रीकृष्ण का शंख (पांचजन्य), उनकी गदा और अन्य दिव्य आयुध भी आकाश मार्ग से अपने-अपने लोकों को प्रस्थान कर गए।
यह इस बात का प्रतीक था कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण के अवतार का उद्देश्य (भू-भार हरण और धर्म की स्थापना) पूरा हो चुका था और अब उनके पृथ्वी से विदा होने का समय आ गया था।















