प्रेस विज्ञप्ति
योगिनी एकादशी व्रत : 10 जुलाई को स्मार्त संप्रदाय (सामान्य गृहस्थ), 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के श्रद्धालु रखें व्रत : महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य)
योगिनी एकादशी का व्रत करने से कुष्ठ (कोढ़) जैसे रोगों से भी मुक्ति मिलने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है।
जम्मू-कश्मीर : – वर्ष में सामान्यतः 24 एकादशियां होती हैं, किंतु जब अधिकमास (मलमास) आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य) ने बताया कि आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का महत्व तीनों लोकों में वर्णित है।
उन्होंने बताया कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत एवं भगवान विष्णु की उपासना करने से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से कुष्ठ (कोढ़) जैसे गंभीर रोगों से भी मुक्ति मिलती है तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत स्त्री एवं पुरुष दोनों कर सकते हैं।
इस वर्ष आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं के मन में यह भ्रम है कि व्रत 10 जुलाई को रखा जाए अथवा 11 जुलाई को। साथ ही, पारण के समय को लेकर भी जिज्ञासा बनी हुई है।
इस वर्ष आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 10 जुलाई, शुक्रवार को प्रातः 8:17 बजे प्रारंभ होगी तथा 11 जुलाई, शनिवार को प्रातः 5:23 बजे समाप्त होगी।
व्रत तिथि निर्धारण
- स्मार्त संप्रदाय (सामान्य गृहस्थ) के श्रद्धालु 10 जुलाई (शुक्रवार) को व्रत रखें।
- वैष्णव संप्रदाय के श्रद्धालु 11 जुलाई (शनिवार) को व्रत रखें।
विशेष सूचना :
जिन श्रद्धालुओं ने स्मार्त संप्रदाय के गुरुओं से दीक्षा ली है, वे 10 जुलाई को ही व्रत रखें।
जिन श्रद्धालुओं ने वैष्णव संप्रदाय के गुरुओं से दीक्षा ग्रहण की है, वे 11 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखें।
वैष्णव की परिभाषा
जिन भक्तों ने वैष्णव संप्रदाय के गुरुओं से दीक्षा ग्रहण की हो तथा जो कंठी या तुलसी की माला धारण करते हों अथवा मस्तक एवं गले पर चंदन, गोपीचंदन, श्रीखंड, ऊर्ध्वपुण्ड्र, त्रिपुण्ड्र अथवा विष्णु-चरण आदि के चिह्न धारण करते हों, उन्हें वैष्णव कहा जाता है।
पारण का समय
जो श्रद्धालु 10 जुलाई को व्रत रखेंगे, वे 11 जुलाई को सुबह 9:26 बजे तक पारण कर सकते हैं।
जो श्रद्धालु 11 जुलाई को व्रत रखेंगे, वे 12 जुलाई को प्रातः 7:14 बजे से 11:18 बजे के मध्य पारण करें।
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस दिन यथाशक्ति ब्राह्मणों एवं जरूरतमंद लोगों को मिष्ठान, अन्न, वस्त्र तथा दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यदि पवित्र नदियों में स्नान संभव न हो, तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें तथा अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
उन्होंने कहा कि एकादशी के दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित है तथा मन में संयम और शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है।
एकादशी व्रत पूजन विधि
एकादशी व्रत में शारीरिक शुद्धता के साथ-साथ मन की पवित्रता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह व्रत विवाहित एवं अविवाहित दोनों कर सकते हैं। व्रत के नियम दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाते हैं। दशमी को सात्विक भोजन ग्रहण करें तथा एकादशी के दिन प्रातःकाल शीघ्र उठकर स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें।
पति-पत्नी संयुक्त रूप से भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें। पूजा स्थान पर श्रीगणेश एवं भगवान लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। गंगाजल अथवा गोमूत्र से स्थान का शुद्धिकरण कर चांदी, तांबा अथवा मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर नारियल स्थापित करें।
इसके पश्चात देवी-देवताओं, नवग्रहों, तीर्थों, योगिनियों एवं नगर देवता का पूजन करें तथा वैदिक मंत्रों एवं विष्णु सहस्रनाम के साथ भगवान लक्ष्मी-नारायण की षोडशोपचार पूजा करें। पूजन के उपरांत व्रत कथा का श्रवण अथवा पाठ करें, आरती करें तथा प्रसाद वितरण करें।
व्रती सायंकाल भगवान विष्णु का पूजन करने के पश्चात फलाहार कर सकते हैं।
एकादशी के दिन इन बातों का रखें विशेष ध्यान
तामसिक भोजन का सेवन न करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहें।
दाढ़ी, मूंछ, बाल एवं नाखून न कटवाएं।
पूजा के समय चमड़े से बनी वस्तुओं, बेल्ट तथा जूते-चप्पलों का प्रयोग न करें।
काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
किसी का दिल न दुखाएं तथा असत्य, हिंसा एवं अधर्म से दूर रहें।
महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य)
अध्यक्ष
श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट (पंजीकृत)
संपर्क सूत्र :
9858293195
7006711011
9796293195
ई-मेल : rohitshastri.shastri1@gmail.com












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