ओंकारेश्वर मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है, लगभग 4th से 5th शताब्दी CE तक। यह मंदिर गुप्त राजवंश द्वारा बनवाया गया था, जो हिंदू मंदिरों और संस्कृति के संरक्षक थे। मंदिर का उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर नर्मदा नदी के बीच में स्थित है और इसकी वास्तुकला बहुत ही अनोखी है

- ओंकारेश्वर का अर्थ: ओंकारेश्वर का अर्थ है “ओम का भगवान”, जहाँ “ओम” भगवान शिव का एक नाम है।
- नर्मदा नदी का उद्गम: ओंकारेश्वर नर्मदा नदी के किनारे स्थित है, जो भारत की एक प्रमुख नदी है।
- शिव पुराण में वर्णन: ओंकारेश्वर का वर्णन शिव पुराण में है, जो एक प्रमुख हिंदू ग्रंथ है।
- चार धामों में से एक: ओंकारेश्वर को चार धामों में से एक माना जाता है, जो हिंदू धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।
- पंचकोशी यात्रा: ओंकारेश्वर पंचकोशी यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है

द्वादश शंभु भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों को संदर्भित करता है, जो हिंदू धर्म में अत्यधिक पूजनीय हैं। ये 12 ज्योतिर्लिंग भारत के विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं और भगवान शिव की विभिन्न अवतारों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नाम:
- सोमनाथ (गुजरात)
- मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश)
- महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
- ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)
- केदारनाथ (उत्तराखंड)
- भीमाशंकर (महाराष्ट्र)
- काशी विश्वनाथ (वaranasi, उत्तर प्रदेश)
- त्र्यंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र)
- वैद्यनाथ (देवघर, झारखंड)
- नागेश्वर (गुजरात)
- रामेश्वरम (तमिलनाडु)
- घुश्मेश्वर (महाराष्ट्र)
इन ज्योतिर्लिंगों का दर्शन और पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ करने से भी इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का फल प्राप्त होता है
ओंकारेश्वर में कई रहस्यमय बातें हैं, जो इसे एक अद्वितीय और पूजनीय स्थान बनाती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख रहस्य हैं:
- भगवान शिव का शयन: मान्यता है कि भगवान शिव यहाँ रात को शयन करने के लिए आते हैं और माता पार्वती के साथ चौसर खेलते हैं।
- पांच मंजिला मंदिर: यह मंदिर पांच मंजिला है, जिसमें प्रत्येक मंजिल पर शिवलिंग स्थापित हैं।
- नंदी की मूर्ति: नंदी की मूर्ति शिवलिंग की ओर नहीं है, जो एक अनोखी विशेषता है।
- आरती का रहस्य: यहाँ की आरती में केवल एक पुजारी मौजूद रहता है, और सुबह मंदिर खोलने पर चौसर के पासे बदले हुए मिलते हैं।
- औरंगजेब का भविष्य: कहा जाता है कि औरंगजेब ने यहाँ अपना भविष्य देखा था।
- चार युगों के प्रतीक: केदारेश्वर गुफा मंदिर में चार स्तंभ हैं, जो चार युगों के प्रतीक माने जाते हैं। जब चौथा स्तंभ गिरेगा, तो प्रलय आ जाएगी ¹ ² ³।












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