दुबई एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाका: धुआं-धुआं हुआ आसमान, सभी उड़ानें निलंबित
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार तड़के दुबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास एक बड़ा हमला हुआ. एक ड्रोन हमले ने एयरपोर्ट के पास स्थित एक ईंधन टैंक को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई. इस हमले के बाद एयरपोर्ट पर अस्थायी रूप से उड़ानें निलंबित कर दी गई हैं…
पिछले 16 दिन से चल रही Gulf War में
अब तक ईरान, अमेरिका और इजराइल के 27 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैँ,
अमेरिका के 20 बिलियन डॉलर
इसराइल के 6 बिलियन डॉलर
ईरान का 1 बिलियन डॉलर से भी कम,
ये भारतीय रूपये में 25 खरब रूपये होते हैँ,
इसके अलावा UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान, कुवैत, लेबनान, जॉर्डन के अलग पैसे खर्च हुए हैँ,
वियतनाम ने ईरान को 60 टन की सहायता सामग्री भेजी है। जिसमें चावल, आटा, इंस्टेंट नूडल्स, फिश सॉस, चीनी, मसाले, और बच्चों व बड़ों के लिए कपड़े शामिल हैं।
विडम्बना देखिए विशाल देश हमले में जान गंवाने वाली बच्चियों और जहाज डुबा कर मारे गए नेवी कैडेट्स की मौत पर दुख व्यक्त करने तक में ट्रंप नाराज न हो जाए यह सोच रहे हैं।
इधर श्रीलंका और वियतनाम जैसे छोटे से देश मानवीयता दिखाने का साहस कर रहे हैं।
मगर ये बात आप भारतवासियों को बताओ भारत सरकार को नही-
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ईरान और भारत की दोस्ती को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि ईरान और भारत के रिश्ते 5,000 साल से भी पुराने हैं।
उन्होंने कहा कि उनके दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई हमेशा भारत के साथ मजबूत दोस्ती और सहयोग पर जोर देते थे। वह भारत से प्रेम करते थे। उन्होंने यह बात ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कही। उन्होंने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और लंबे समय से चले आ रहे संबंधों पर कहा कि ईरान भारत के साथ अपने संबंधों में किसी भी तरह का टकराव या समस्या नहीं चाहता है।उन्होंने आगे कहा, ‘यहां तक कि उनके बेटे भी भारत के साथ अच्छे सहयोग पर जोर देते थे और भारतीयों की तारीफ करते थे। वह भारतीयों को बहुत वफादार, बहुत ईमानदार, बहुत दयालु और बहुत समझदार कहते हैं। इसलिए हम अपने रिश्तों और दोस्ती में कभी भी किसी तरह की समस्या नहीं चाहते, और मुझे पूरा यकीन है कि हमारे रिश्तों में कोई टकराव या समस्या नहीं है, जो बहुत पहले शुरू हुए थे और आगे भी जारी रहेंगे।’












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