गगन दमामा बाजिया पड्या निशानै घाव// भगवान की भक्ति जागृत होते ही आकाश में दमामा यानि युद्ध का बाजा बजने लगता है, युद्ध छिड़ जाता है, और अपनी जान पर खेलना पड़ता है, तब कहीं जाकर ईश्वर की भक्ति की जा सकती है_ कृपा शंकर

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योग या तंत्र मार्ग की कोई भी साधना हो, ईश्वर को समर्पित होकर की गई भक्ति में कोई भय नहीं है —
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भगवान से खूब प्रेम करें, समयोचित मार्गदर्शन निश्चित रूप से मिलेगा। “गगन दमामा बाजिया पड्या निशानै घाव” — भगवान की भक्ति जागृत होते ही आकाश में दमामा यानि युद्ध का बाजा बजने लगता है, युद्ध छिड़ जाता है, और अपनी जान पर खेलना पड़ता है, तब कहीं जाकर ईश्वर की भक्ति की जा सकती है। “सीस उतारि पग तलि धरे,तब निकटि प्रेम का स्वाद” — अपना सिर काट कर पैरों के नीचे रखने यानि अपने अहंकार को मिटा देने से ही प्रभु प्रेम का स्वाद मिलता है।
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आकाश में इतने पक्षी उड़ते हैं, सभी का अपना अपना मार्ग होता है| सभी साधकों का एक ही मार्ग नहीं हो सकता। हम जहाँ पर भी स्थित हैं वहीं से लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा। अपने पूर्व जन्मों के कर्मानुसार अपनी आध्यात्मिक स्थिति, वर्तमान मानसिकता, व्यक्तित्व दोष, क्षमता और नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव आदि का आंकलन कर अपना मार्ग स्वयं चुनें। यदि चुननें में असमर्थ हों तो किन्हीं सदगुरु से मार्गदर्शन प्राप्त करें। हमारा मन एक गिद्ध है जो स्वभावतः संसार की नकारात्मक गंदगी की ओर ही देखता है। अपने विचारों के प्रति सजग रहें, क्योंकि हमारे विचार ही हमारे कर्म हैं जो अवश्य फलीभूत होते हैं। यह संसार हमारे विचारों का ही घनीभूत रूप है। मन में यदि बुरे विचार आते हैं तो उनके विपरीत चिंतन करो। परमात्मा का निरंतर चिंतन सबसे अधिक सकारात्मक कार्य है जो हम कर सकते हैं, क्योंकि उपासक में उपास्य के गुण अवश्य आते हैं।
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भारत का भविष्य उज्जवल है। असत्य और अन्धकार कि शक्तियाँ पराभूत होंगी व भारत निश्चित रूप से एक आध्यात्मिक हिन्दू राष्ट्र बनेगा। इसका आंतरिक आश्वासन मुझे प्राप्त है। इस सृष्टि की रचना प्रकाश और अंधकार से हुई है। अधिक से अधिक आंतरिक प्रकाश में वृद्धि का प्रयास ही आध्यात्मिक साधना है। जीवन का एक एक पल, जीवन के एक एक वर्ष से अधिक महत्वपूर्ण है। जीवन के हर एक पल में भगवान की गहन स्मृति बनाए रखेंगे, तो हम पायेंगे कि हमारा जीवन भगवान की भक्ति से परिपूर्ण था। भक्ति को यदि आने वाले कल तक टाल दें तो भक्ति कभी भी नहीं होगी। वर्तमान क्षण ही महत्वपूर्ण है, आगे आने वाला समय नहीं। जिस भी क्षण भगवान की याद आये और अन्तःप्रेरणा मिले, उसी क्षण भगवान की भक्ति करो, बाद में फिर कभी नहीं होगी। ॐ तत् सत्॥ ॐ ॐ ॐ॥
कृपा शंकर

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