संक्रांति//संक्रांति का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश या संक्रमण होना। हर साल 12 संक्रांतियाँ होती हैं,संक्रांति के दिन खिचड़ी खानि चाहिए ,महाभारत काल में द्रौपदी ने पांडवों के लिए खिचड़ी बनाई थी, जिसके एक दाने से भगवान कृष्ण ने ऋषि दुर्वासा की भूख शांत की थी

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संक्रांति

संक्रांति का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश या संक्रमण होना। हर साल 12 संक्रांतियाँ होती हैं,

विभिन्न नाम: इसे अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है:
सूर्य देव की किरणें पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध की ओर अधिक आने लगती हैं, जिसे शुभ माना जाता है।
संक्रांति प्रकृति के प्रति आभार, ऋतु परिवर्तन और दान के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रतीक है।

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संक्रांति के दिन खिचड़ी खानि चाहिए

उड़द दाल (जो शनि से संबंधित है) और चावल (सूर्य से) की खिचड़ी बनाने और खाने से सूर्य और शनि दोनों प्रसन्न होते हैं, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। 
पौराणिक कथा: महाभारत काल में द्रौपदी ने पांडवों के लिए खिचड़ी बनाई थी, जिसके एक दाने से भगवान कृष्ण ने ऋषि दुर्वासा की भूख शांत की थी, इस कथा से भी इसका महत्व जुड़ता है। 
वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण
पोषक तत्वों से भरपूर: दाल और चावल का यह मिश्रण शरीर को संपूर्ण पोषण देता है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। 
आसानी से पचने योग्य: यह भोजन हल्का और पचने में आसान होता है, इसलिए यह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए भी फायदेमंद है। 
ऊर्जा और गर्माहट: सर्दियों के चरम पर यह शरीर को आवश्यक ऊर्जा और गर्माहट प्रदान करती है, जबकि घी पाचन को मजबूत करता है। 
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
अन्न का दान: खिचड़ी का दान करना शुभ माना जाता है, जो सामाजिक समरसता और करुणा का प्रतीक है। 
‘खिचड़ी पर्व’: उत्तर भारत, खासकर गोरखपुर में, मकर संक्रांति को ‘खिचड़ी पर्व’ के नाम से जाना जाता है, और इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक महत्वपूर्ण परंपरा है।

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