स्व: विचार एवं संगत
जीवन निर्माण में विचारों एवं संगति की बहुत बड़ी भूमिका होती है। संगति हमारे विचारों का निर्धारण करती है और विचारों से ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। केवल हमारे जीवन की बुराई से ही हमारा जीवन बुरा नहीं बन जाता अपितु दूसरों के जीवन की बुराई देख-देखकर भी हमारा चित्त मलीन एवं जीवन विकार युक्त बन जाता है।
जिस प्रकार हम जो करते हैं उसका प्रभाव आपके साथ-साथ हमारे संपर्क में आने वाले लोगों पर भी पड़ता है। इसी प्रकार हमारे संपर्क में आने वाले दूसरे लोग जो कुछ करेंगे उसका प्रभाव भी हमारे व्यक्तिगत जीवन पर अवश्य पड़ेगा ।
चंदन वृक्ष की संगति से सामान्य वृक्षों में सुगंधी आने लग जाती है और दूध की संगति से पानी का भाव भी बढ़ जाता है। इसी प्रकार से जीवन में हमारा परिवेश, हमारा संग, हमारा समाज हमारे जीवन को मूल्यवान अथवा निर्मूल्य बना देता है। पवित्र जीवन के लिए पवित्र विचार एवं पवित्र विचारों के लिए पवित्र परिवेश का होना भी अति आवश्यक है।
छोटे छोटे प्रयास ही हमारे जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। यदि जीवन का आनंद बाहर से आने की प्रतीक्षा है तो समझ लीजिए कि हम कभी प्रसन्न नहीं रह पाएँगे।
!!!…Worrying Does Not Take Away Tomorrow’s Trouble. But It Takes Away Today’s Peace. So Be Happy And Think Positive Always…!!!
आत्मरक्षा में धर्मयुद्ध करना मनुष्य का परम कर्त्तव्य है
सनातन ज्ञान विकास
















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