दु:ख और कष्ट भगवान की बनाई हुई वह प्रयोगशाला है,
जहां हमारी प्रतिभा और आत्मविश्वास की
वास्तविक परीक्षा होती है।
किन्तु जो भी ईश्वर की इस परीक्षा में उत्तीर्ण होता है,
वह जीवन की प्रत्येक परीक्षा में उत्तीर्ण होता है
” जिदंगी में दो शब्द बहुत खास हैं,
‘प्रेम’ और ‘ध्यान’!
क्योंकि ये अस्तित्व के मंदिर के दो विराट दरवाजे हैं!!
चाहो तो ‘प्रेम’ से प्रवेश कर जाओ,
चाहो तो ‘ध्यान’ से प्रवेश कर जाओ!
शर्त एक ही है…
अहंकार दोनों में छोड़ना होता है!!”
परिवार ही वो एकमात्र जगह है,
जहां हमें खुद की
सारी कमियों के साथ
स्वीकार किया जाता है।
















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