बिच्छू और ऋषि एक प्रसिद्ध कहानी है,
जिसमें एक ऋषि बार-बार एक डूबते बिच्छू को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर बार बिच्छू उन्हें डंक मारता है; आखिर में ऋषि कहते हैं कि बिच्छू का काम डंक मारना है और उनका काम भलाई करना है, और वे अपनी भलाई की आदत नहीं छोड़ेंगे, भले ही सामने वाला बुरा हो, और इस तरह ऋषि अपनी अच्छाई पर कायम रहते हैं.
एक संत (ऋषि) नदी के किनारे स्नान कर रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक बिच्छू पानी में डूब रहा है.
संत ने उसे बचाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, लेकिन बिच्छू ने उन्हें डंक मार दिया, और संत के हाथ से छूटकर वह वापस पानी में गिर गया.
संत ने फिर से उसे बचाने का प्रयास किया, और फिर से बिच्छू ने डंक मारा. ऐसा तीन बार हुआ.
पास खड़ी एक महिला ने उनसे पूछा, “आप इसे बार-बार क्यों बचा रहे हैं, जब यह आपको डंक मार रहा है?”.
संत ने उत्तर दिया, “यह बिच्छू है, और इसका स्वभाव डंक मारना है. मैं एक संत हूँ, और मेरा स्वभाव भलाई करना है. मैं अपनी भलाई की आदत क्यों छोड़ूँ, सिर्फ इसलिए कि यह बिच्छू अपनी आदत नहीं छोड़ रहा?”.
नैतिक शिक्षा
दूसरों के बुरे व्यवहार के कारण अपनी अच्छाई और दयालुता का स्वभाव नहीं छोड़ना चाहिए.
अपने अच्छे गुणों पर कायम रहना चाहिए, भले ही लोग स्वार्थी या क्रूर हों.
















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