|| भीतर की शांति ||
भीतर की शांति ही हमारे जीवन में प्रसन्नता का स्तर निर्धारित करती है। जिसके भीतर शांति होगी उसकी बाहर की दुनिया भी शांतियुक्त एवं प्रसन्नता से परिपूर्ण ही होगी। बाहर के दुःखों से मनुष्य लड़ लेता है, लेकिन भीतर के क्लेशों का सामना करना उसके लिए सबसे कठिन हो जाता है। बात चाहे स्वयं के भीतर की हो अथवा घर के भीतर की, दोनों ही क्लेश एक मनुष्य को तोड़ने के लिए किसी शस्त्र के समान हैं।
दुनिया में अपनी वीरता का पराक्रम दिखाने वाला शूरवीर भी भीतर के क्लेशों के आगे मात खाकर हताश हो जाता है। स्वयं के भीतर हो अथवा घर के भीतर, जहाँ शांति का वास होता है, वहाँ मनुष्य के जीवन में खुशियों का निवास भी होता है। मन के भीतर की शांति किसी मनुष्य को खुशहाल कर देती है और घर के भीतर की शांति पूरे जीवन को ही निहाल कर देती है।
जय श्री राधे कृष्णा
















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