कैप्टन की कहानी वफादारी और एक रहस्यमयी जुड़ाव की मिसाल है।
तोहफे से शुरुआत: साल 2005 में मिगुएल गुज़मैन ने यह कुत्ता अपने बेटे को तोहफे में दिया था।
मालिक की अचानक मौत: साल 2006 में मिगुएल की अचानक मृत्यु हो गई। उनके अंतिम संस्कार के बाद कैप्टन घर से गायब हो गया। परिवार ने सोचा कि वह कहीं भाग गया या किसी ने उसे चुरा लिया।
कब्र पर मिलना: कुछ हफ़्तों बाद जब परिवार मिगुएल की कब्र पर गया, तो वे हैरान रह गए। कैप्टन वहीं मिगुएल की कब्र के पास बैठा रो रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि कैप्टन को कभी उस कबरिस्तान में ले जाया ही नहीं गया था, फिर भी उसने खुद ढूंढकर अपने मालिक की कब्र खोज ली।
11 साल का पहरा: परिवार ने उसे कई बार घर वापस लाने की कोशिश की, लेकिन वह हर बार वापस कबरिस्तान भाग जाता। कबरिस्तान के स्टाफ ने बताया कि वह दिनभर वहां घूमता था, लेकिन हर रात ठीक 6 बजे वह मिगुएल की कब्र पर जाकर सो जाता था। उसने साल 2018 में अपनी मृत्यु तक, यानी पूरे 11 साल वहीं गुज़ारे।
2nd story
हाचिको (Hachiko) – जापान का अकिता
दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और वफादार कुत्तों की कहानी में हाचिको का नाम सबसे ऊपर आता है।
रोज का नियम: हाचिको अपने मालिक, प्रोफेसर हिदेसाबुरो उएनो से बहुत प्यार करता था। प्रोफेसर रोज़ ट्रेन से काम पर जाते थे। हाचिको रोज़ सुबह उन्हें विदा करने टोक्यो के शिबुया स्टेशन (Shibuya Station) जाता था और शाम को ठीक उसी समय उनके स्वागत के लिए स्टेशन पर खड़ा रहता था।
अचानक बिछड़ना: मई 1925 में, काम के दौरान प्रोफेसर को ब्रेन हैमरेज हुआ और उनकी मृत्यु हो गई। वे कभी स्टेशन वापस नहीं लौटे।
9 साल और 9 महीने का इंतजार: हाचिको को नहीं पता था कि उसके मालिक अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह अगले करीब 10 साल तक, हर दिन, हर मौसम (चाहे बारिश हो या बर्फ़बारी) ठीक उसी समय शिबुया स्टेशन पर आकर बैठता रहा।











