अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों ने भारत के चंद्रयान-1 से मिले आंकड़ों के आधार पर चंद्रमा के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में करीब 4 अरब साल पुराने ऑस्ट्रियल बेसिन (Australe Basin) की खोज की है।
इस खोज से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं
तालाब या बेसॉल्ट कुंड
इस प्राचीन बेसिन के क्षेत्र में 248 छोटे बेसॉल्ट (Basalt) तालाब मिले हैं, जो एक गोलाकार पैटर्न में व्यवस्थित हैं।
ये तालाब चिकनी लावा सतहों वाले सामान्य प्रभाव बेसिनों से अलग हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह संरचना चंद्रमा के सबसे पुराने ज्ञात साउथ पोल ऐटकेन बेसिन (South Pole-Aitken Basin) से भी पुरानी हो सकती है, जो लगभग 4 अरब साल पुरानी है।
इसकी पुष्टि चंद्रयान-1 पर लगे नासा के मून मिनरलोलॉजी मैपर (Moon Mineralogy Mapper) के इमेजिंग डेटा के उपयोग से हुई है।

जीवन की संभावना का अध्ययन
वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, अरबों साल पहले चंद्रमा पर जब ज्वालामुखी गतिविधि चरम पर थी, तब अंदरूनी गर्म वाष्पशील गैसों के उत्सर्जन से सतह पर ऐसे तरल जल के कुंड या तालाब बनने की संभावना पर भी अध्ययन किए गए हैं।
वैज्ञानिक पिछले करीब एक दशक से यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि आखिकार चांद का जन्म कैसे हुआ। अब इस ताजा शोध में पता चला है कि दो विशाल गोले धरती के मेंटल में अफ्रीका और प्रशांत महासागर के नीचे दबे हुए हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये गोले एक ग्रह के अवशेष हो सकते हैं जो सोलर सिस्टम के शुरुआती दौर में धरती पर गिरा था। उन्होंने कहा कि जब यह कथित ग्रह धरती पर गिरा तो बहुत बड़े पैमाने पर मलबे की बारिश हुई और इसी से चांद जन्म हुआ।











