महात्मा गांधी के जीवन की सबसे प्रसिद्ध और प्रेरणादायक कहानियों में से एक “एक कुर्ते की कहानी” (या बच्चों के साथ उनका संवाद) है, जो उनके पूरे देश को अपना परिवार मानने के विचार को दर्शाती है
कुर्ते वाली प्रेरक कहानी
घटना: एक बार महात्मा गांधी यात्रा कर रहे थे या सभा में थे। तब उन्होंने केवल एक धोती पहनी हुई थी, ऊपर कुर्ता नहीं था।
बच्चे का सवाल: उन्हें इस रूप में देखकर एक छोटे बच्चे ने उनसे पूछा, “बापू, आपने कुर्ता क्यों नहीं पहना है?”
गांधीजी का जवाब: गांधीजी मुस्कुराए और बोले, “मेरे पास कुर्ता सिलवाने के पैसे नहीं हैं।”
बच्चे की मासूमियत: यह सुनकर बच्चा बहुत दुखी हुआ और अपनी माँ से बोला, “बापू के पास पैसे नहीं हैं, आप उनके लिए एक कुर्ता सिल दीजिए।”
बड़ी सीख: गांधीजी ने बच्चे को प्यार से समझाया, “बेटा, मेरे इस देश में चालीस करोड़ भाई-बहन रहते हैं। उनमें से कितनों के पास पहनने को पूरे कपड़े भी नहीं हैं। जब तक उन सब के पास कुर्ता न हो, तब तक मैं अकेला कुर्ता कैसे पहन सकता हूँ? ये पूरा देश ही मेरा परिवार है।”
इस बात ने उस बच्चे के मन पर गहरा प्रभाव डाला और उसने बड़े होकर देश की सेवा करने का संकल्प लिया। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा नेता और इंसान वही है जो समाज के सबसे गरीब और आखिरी व्यक्ति की फिक्र करे











