हिटलर की जिंदगी के अंतिम दिन (30 अप्रैल 1945) को बर्लिन में रीच चांसलरी के नीचे बने जमीनदोज बंकर में उसकी सत्ता और जिंदगी दोनों का अंत हुआ था। सोवियत रूस की ‘रेड आर्मी’ बंकर से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर थी और जर्मनी की हार तय हो चुकी थी।
हिटलर के आखिरी दिन का घटनाक्रम इस प्रकार था:
- आखिरी संदेश और दोपहर का भोजन: सुबह के समय हिटलर को सूचना मिली कि जर्मन सेना का गोला-बारूद खत्म होने की कगार पर है। दोपहर करीब 2:00 बजे हिटलर ने अपनी पत्नी ईवा ब्राउन (जिससे उसने एक दिन पहले ही शादी की थी) के साथ अपना आखिरी शाकाहारी भोजन किया।
- सहयोगियों से अंतिम विदाई: भोजन के बाद हिटलर और ईवा ने अपने खास करीबियों—जैसे जोसेफ गोबल्स और मार्टिन बोमन—से हाथ मिलाकर अंतिम विदाई ली। हिटलर ने अपने स्टाफ से कहा कि वे वफादारी की कसम से आजाद हैं और उन्हें बंकर से निकलकर पश्चिम की ओर भागने की सलाह दी।
- आत्महत्या: दोपहर लगभग 3:30 बजे हिटलर और ईवा ब्राउन अपने निजी कमरे (स्टडी रूम) में चले गए। वहां हिटलर ने खुद को गोली मार ली और ईवा ब्राउन ने साइनाइड (जहर) खाकर आत्महत्या कर ली।
- शवों को जलाना: हिटलर को डर था कि सोवियत सेना उसके शव को पकड़कर कोई तमाशा या बेइज्जती करेगी, जैसा कि इटली के तानाशाह मुसोलिनी के शव के साथ हुआ था। इसलिए उसके कड़े निर्देशों के अनुसार, बंकर के गार्ड्स ने दोनों के शवों को तुरंत बाहर चांसलरी के बगीचे में ले जाकर पेट्रोल छिड़ककर जला दिया।

हिटलर की मौत के महज एक हफ्ते के भीतर, 7 मई 1945 को जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया और यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया।
एडॉल्फ हिटलर अपनी माँ क्लारा हिटलर (Klara Hitler) को बहुत अधिक स्नेह और सम्मान करता था।
माँ के प्रति हिटलर का लगाव
गहरा प्रेम: इतिहासकार मानते हैं कि क्लारा हिटलर शायद अपने पूरे जीवन में एकमात्र ऐसी व्यक्ति थीं जिनसे हिटलर वास्तव में सच्चा प्रेम करता था।
बचपन की यादें: हिटलर ने अपनी माँ की देखरेख में बीते बचपन को अपने जीवन के “सबसे खुशहाल दिन” बताया था।
कला के प्रति समर्थन: जब हिटलर के सख्त पिता अलॉयस हिटलर (Alois Hitler) उसके चित्रकार बनने के सपनों के खिलाफ थे, तब उसकी माँ ने उसका साथ दिया और उसकी हर इच्छा का पूरा ध्यान रखा।
अंतिम समय तक याद: जब 1907 में स्तन कैंसर के कारण उसकी माँ का निधन हुआ, तो हिटलर बेहद दुखी हुआ था। वह जीवन के अंतिम दिनों तक अपने बंकर में भी अपनी माँ की तस्वीर साथ रखता था।











