राम नवमी सनातन धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार, भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (मार्च-अप्रैल) को मनाया जाता है, जो चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है। वर्ष 2026 में, यह पावन पर्व 27 मार्च को मनाया जा रहा है, जो मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्म की खुशी में समर्पित है।
इस दिन अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में भगवान राम के अवतरण का प्रतीक है।
तिथि और समय (2026): नवमी तिथि 26 मार्च को 11:48 AM बजे शुरू होकर 27 मार्च को 10:06 AM बजे समाप्त होगी, जिसमें उदया तिथि के अनुसार 27 मार्च को पूजा मुख्य है।
पूजा विधि
भक्त इस दिन सुबह स्नान के बाद व्रत रखते हैं, रामायण का पाठ करते हैं, और रामलला की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं।
यह पर्व धर्म, सत्य और मर्यादा की स्थापना का प्रतीक है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है।
अयोध्या सहित देश भर के मंदिरों में विशेष पूजा, भजन और कीर्तन होते हैं, और कन्या पूजन भी किया जाता है।
श्री राम मुख्य रूप से ‘सत्य’ और ‘धर्म’ का पालन करने की बात हमेशा कहते थे। वे अपनी एकवचनी मर्यादा के लिए जाने जाते थे, जहाँ उन्होंने जीवनभर प्रेम, भाईचारा, कर्तव्य और अहंकार त्यागकर जीवन जीने का संदेश दिया, जैसे: “रघुकुल रीत सदा चलि आई, प्रान जाई पर बचनु न जाई
सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है
पिता के आदेश का पालन करना और माता व मातृभूमि को स्वर्ग से बढ़कर मानना।
उन्होंने हमेशा स्वयं को एक साधारण मनुष्य मानकर मर्यादा और कर्तव्य को प्राथमिकता दी।
प्रेम और भाईचारा: केवट और शबरी जैसे निस्वार्थ प्रेम करने वालों को सम्मान देकर उन्होंने समाज को जोड़ने का काम किया।
प्रजा की खुशी में ही राजा की खुशी है
जीवन के प्रति दृष्टिकोण: जैसा भी जीवन प्राप्त हो, उसे अच्छी तरह जीना चाहिए, क्योंकि सुख का रास्ता जीवन जीने से ही निकलता है।
राम एक मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में, जीवन की विषम परिस्थितियों में भी, धर्म और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का संदेश देते हैं
















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