श्री सप्तशती की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ***
सप्तशती का आरम्भ अष्टम मनु सावर्णि: की उत्पत्ति से होता है l यह सुनिश्चित भविष्यवाणी है कि अष्टम मनु सावर्णिः ही होंगे l ऐसा वरदान उन्हें स्वारोचिष मनु जो द्वितीय मनु हुए उनके काल में ही मिल चुका है l यह कोई छोटा या साधारण वरदान नहीं था जो आसानी से मिल जाता और शीघ्र घटित भी हो जाता l
सृष्टि एक कल्प की होती है l एक कल्प
४३२ करोड़ वर्ष का होता है l पृथ्वी पर कल्प की व्यवस्था १४ मनु सम्भालते हैं l अब तक ६ मनु अपना राज्य भोग कर समाप्त हो चुके हैं l ७ वां मनु जिसका नाम वैवस्वत है चल रहा है l यदि मनु और उनके कार्यकाल के ऊपर लेखन किया जाये तो चक्रीय सृष्टि के रहस्य खुलने लगते हैं और हजारों पृष्ठ का लेखन संभव हो सकता है l
एक कल्प में १४ मनु और १५ मन्वन्तर संधियाँ होती हैं l एक संधि १७ लाख २८ हजार वर्ष की होती है l १ मनु ३०६७२०००० वर्ष का होता है l
१४ मनु ४२९४०८०००० वर्ष हुआ l एक संधि १७२८०००० वर्ष l कुल १५ संधि २५९२००००
वर्ष की हुई l १४ मनु और १५ संधि काल जोड़ने से ४३२ करोड़ वर्ष होता है l
एक मनु का कुल कार्यकाल अथवा आयु
३० करोड़ ६७ लाख २० हजार वर्ष की होती है l
स्वायंभुव मनु के बाद स्वारोचिष मनु हुए थे l इनके पुत्र का नाम था चैत्र l इन्ही चैत्र के नाम पर प्रसिद्ध चैत्र वंश हुआ था l इसी चैत्र वंश में सुरथ नामक राजा हुए थे l
एक मनु से दूसरे मनु के बीच संधि काल सत्य युग मान के तुल्य होता है अर्थात् १७ २८ ००० वर्ष संधि काल होता है l स्वारोचिष मनु के काल में सुरथ हुएl उन्होंने महामाया की तपस्या की l भगवती ने उन्हें वरदान दिया की तुम आठवें मनु
बनोगे और तुम्हारा नाम सावर्णि: होगा l तब तक देवी लोक में रह कर तुम्हें प्रतीक्षा करनी पड़ेगी l
सूर्यसिद्धांत ग्रन्थ के अनुसार जब अहर्गण
निकाला जाता है तब प्रत्येक मनु में मन्वन्तर संधि भी जोड़ी जाती है जो १७२८००० वर्ष के तुल्य होती है l स्वारोचिष के बाद उत्तम,तामस, रैवत और चाक्षुष मन्वन्तर बीत चुके हैं l वैवस्वत मनु का कार्यकाल चल रहा है l इसमें २८ वां महायुग का कलियुग चल रहाहै lअभी ४३ महायुग शेष हैं l
इंद्र,मनु या सप्तर्षि पद पाने के लिए घोर तप करना पड़ता है l लंबी प्रतीक्षा भी करनी पड़ती है l
महाराज सुरथ ने मात्र तीनवर्ष तक घोर तप किया था और मनु के पद को प्राप्त किया l
सुरथ नाम का अर्थ भी विलक्षण है l जिसके पास अत्यन्त शोभन रथ हो वह सुरथ है अथवा जिसमें मन रमण करे वह रथ है l सुंदर रथ सुरथ कहलाता है l सुरथ सार्वभौम राजा थे l उनका रथ दिग दिगन्त गामी था l फिर भी वे थोड़े से शत्रुओं से पराजित हो गये क्यों? क्योंकि उन्होंने भगवती की आराधना नहीं की थी l सार्वभौमत्व तभी तक सुरक्षित रहता है जब तक नियति चाहती है l अतः अपने राष्ट्र को रक्षित रखने के लिए राष्ट्री देवी की आराधना अवश्य करनी चाहिए l
** ह्रीं नमश्चंडिकायै **
श्री सप्तशती रहस्य //सप्तशती का आरम्भ अष्टम मनु सावर्णि: की उत्पत्ति से होता है l यह सुनिश्चित भविष्यवाणी है कि अष्टम मनु सावर्णि ही होंगे_ मनीष चन्द्र पांडे अयोध्या
















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