हनुमान जी की उड़ने की शक्ति उन्हें पवनपुत्र होने के कारण जन्मजात प्राप्त थी, जिसे उन्होंने भगवान शिव के अंशावतार के रूप में और देवताओं के वरदान (विशेषकर वायु देव और ब्रह्मा) से और अधिक प्रबल किया। यह शक्ति उन्हें वायु के समान तीव्र और अकल
किमी/सेकंड से अधिक) प्रदान करती थी, जो फाइटर जेट से भी तेज थी।
प्राप्ति का कारण:
पवनदेव द्वारा सिखाया गया उड़ने का ज्ञान, वानर रूप होने के बावजूद, उनके असीमित बल और दिव्य आशीर्वाद का हिस्सा था।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण/
विशेषताएं: हनुमान जी अपनी योग शक्ति, ‘अनिमा’ (अत्यंत छोटा होने की शक्ति) और ‘महिमा’ (अत्यंत बड़ा होने की शक्ति) का उपयोग करके शरीर को हल्का कर आकाश में उड़ते थे।
किमी/सेकंड से अधिक थी, जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से निकलने के लिए आवश्यक पलायन वेग (escape velocity) के बराबर है।
ऐतिहासिक संदर्भ:
बचपन में सूर्य को फल समझकर पकड़ने की कोशिश और लंका जाते समय समुद्र लांघना उनकी उड़ने की महान क्षमताओं के उदाहरण हैं।
















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