भगवान श्रीकृष्ण भगवद गीता में स्वयं को सृष्टि का मूल, आधार और कर्ता बताते हैं। “अहं सर्वस्य प्रभवो” के अनुसार, वे कहते हैं कि सब कुछ उनसे ही उत्पन्न होता है और अंतत उन्हीं में समा जाता है।
महाभारत, जो धर्म की स्थापना के लिए रची गई एक महागाथा है, श्रीकृष्ण की दिव्य योजना और उनकी उपस्थिति से संचालित है।
सर्वोच्च कर्ता
कृष्ण ने गीता में स्पष्ट किया है कि वे सृष्टि के पिता, माता, आधार, और रक्षक हैं।
महाभारत में भूमिका
वे महाभारत युद्ध के न केवल एक रणनीतिकार और पांडवों के सलाहकार थे, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना के लिए पूरी घटना के सूत्रधार भी थे।
कर्म का संदेश:
श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से यह शिक्षा दी कि मनुष्य को केवल अपना कर्तव्य (कर्म) करना चाहिए, परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सब कुछ उन्हीं की इच्छा से होता है।
संक्षेप में, महाभारत युद्ध में जो कुछ भी हुआ, वह श्रीकृष्ण की दिव्य इच्छा के अनुसार एक योजनाबद्ध लीला थी।
















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