स्वीटी अख्तर (Sweety Akhtar) की माँ जोहुरा बेगम (Johura Begum) और उनके पिता फजल मियां का रो-रोकर बुरा हाल है। शुरुआत में उन्होंने यह मानने से इंकार कर दिया था कि जिसकी मौत की सजा हुई है, वह उनकी बेटी है।
उनकी माँ और परिवार का ऐसा कहना निम्नलिखित कारणों से था:
आधिकारिक जानकारी न मिलना: सऊदी अरब या बांग्लादेश सरकार की तरफ से परिवार को फांसी दिए जाने की कोई लिखित या आधिकारिक पुष्टि (Official Confirmation) नहीं दी गई थी। परिवार ने यह खबर सिर्फ फेसबुक और मीडिया के जरिए सुनी थी।
फांसी से एक दिन पहले बात होना: स्वीटी ने फांसी होने से ठीक एक दिन पहले, 13 अक्टूबर की शाम को अपने पिता से फोन पर बात की थी। उसने बातचीत में किसी भी तरह के मुकदमे या मौत की सजा (Death Sentence) का जिक्र नहीं किया था।
रिहाई की उम्मीद: स्वीटी ने अपने माता-पिता से कहा था कि वह बेगुनाह है और शायद 2 महीने के अंदर जेल से छूट जाएगी। इसलिए उसकी माँ को विश्वास नहीं हो रहा था कि उनकी बेटी को अचानक फांसी दे दी गई है।
झूठा फंसाए जाने का दावा: स्वीटी ने जेल से अपने परिवार को बताया था कि काम करने वाली कुछ अन्य महिलाओं से उसकी बहस हो गई थी, जिसके बाद उसे साजिश के तहत झूठा फंसा दिया गया था।
अब उनकी माँ जोहुरा बेगम सिर्फ रोते हुए सरकार से गुहार लगा रही हैं कि “मेरी बेटी वापस लाओ, कम से कम उसका शव (Body) ही मुझे दिखा दो।” उनका परिवार बांग्लादेश के टांगैल (Tangail) जिले के मिर्जापुर का रहने वाला है।
सऊदी अरब में 14 अक्टूबर 2026 को जिन दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दी गई थी, उनमें से एक स्वीटी अख्तर (Sweety Akhtar) महिला थीं और दूसरे नजरुल इस्लाम (Nazrul Islam) पुरुष थे।
शुरुआती सोशल मीडिया अफवाहों और दावों में इन्हें पति-पत्नी (नवविवाहित जोड़ा) या उमरा पर गए यात्री बताया जा रहा था। लेकिन आधिकारिक और पारिवारिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि:
दोनों पति-पत्नी नहीं थे: नजरुल इस्लाम अविवाहित थे और स्वीटी अख्तर तलाकशुदा थीं।
दोनों सऊदी अरब में बतौर प्रवासी सफाईकर्मी (Cleaner) काम करते थे।
सजा की वजह: सऊदी गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों को मक्का की एक मस्जिद में कथित अश्लील कृत्य (तजीर के तहत) के आरोप में अदालत द्वारा मौत की सजा दी गई थी।











