ब्रह्मा जी ने अपनी शक्ति से सरस्वती को उत्पन्न किया था, इसलिए उन्हें सरस्वती की माता नहीं माना जाता, बल्कि सरस्वती को ब्रह्मा जी की बेटी माना जाता है। सरस्वती की सुंदरता और आकर्षक रूप से ब्रह्मा जी भी मोहित हो गए थे, और उन्होंने सरस्वती से विवाह किया।
यहां इस कहानी के कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
सरस्वती का जन्म:
सरस्वती को ब्रह्मा जी ने अपने तेज से उत्पन्न किया था, इसलिए उनकी कोई माता नहीं थी।
ब्रह्मा जी का मोहित होना:
सरस्वती की सुंदरता और आकर्षक रूप से ब्रह्मा जी मोहित हो गए थे।
विवाह:
सरस्वती ने अपने पिता से विवाह करने से बचने की कोशिश की, लेकिन अंततः उन्हें ब्रह्मा जी से विवाह करना पड़ा।
पुत्र:
ब्रह्मा और सरस्वती का एक पुत्र हुआ, जिसका नाम स्वयंभू मनु था।
अन्य प्रसंग:
इस कहानी के अलावा, कुछ अन्य प्रसंग भी प्रचलित हैं, जिनमें सरस्वती को ब्रह्मा जी की पत्नी भी बताया गया है।
ब्रह्मा जी की पूजा न करना:
ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी की पूजा इसलिए नहीं की जाती क्योंकि उन्होंने अपनी ही बेटी से विवाह किया था।

प्रथम पुरुष और स्त्री:
मनु को धरती पर प्रथम पुरुष और उनकी पत्नी शतरूपा को प्रथम स्त्री माना जाता है.
मानव जाति की उत्पत्ति:
मनु और शतरूपा की संतान से मानव जाति की उत्पत्ति हुई,
इसलिए मनु को मानव जाति का पिता भी कहा जाता है.
अन्य नाम:
स्वायंभुव मनु को आदि भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है प्रारंभ.
मन्वंतर:
ब्रह्मा के एक दिन को कल्प कहते हैं और एक कल्प में 14 मनु होते हैं, जिन्हें मन्वंतर कहा जाता है.
वर्तमान मनु:
वर्तमान में वैवस्वत मनु (7वें मनु) हैं.
पुत्र-पुत्रियाँ:
मनु के प्रियव्रत, उत्तानपाद आदि सात पुत्र और तीन कन्याएँ थीं.
शतरूपा:
शतरूपा ब्रह्मा जी की पुत्री भी मानी जाती हैं.
वेदों का विभाजन:
मनु ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया था.