एक चिंतन…………………………
किसी का अनावश्यक अपमान ना करें ,
” क्योंकि “________
याद रखें दर्पण भी सुंदर तभी तक दिखता है जब तक वह टूटटा नहीं, टूटने के बाद एक धारदार हथियार बन जाता है..।।
किसी का हृदय इतना भी मत दुखाना; कि तुम्हारा नाम लेकर परमात्मा के सामने रो पड़े,
” क्योंकि “_________
एक सच्चे और अच्छे व्यक्ति की हाय अर्थ से फर्श तक लाने में देर नहीं करती…।।
किताबों के साथ-साथ लोगों को भी पढ़े ,
” क्योंकि “_________
किताबें ज्ञान देती है और लोग अनुभव…।।
सद्चिन्तन
मां के पेट में बच्चा एक जोड़ द्वारा मां से जुड़ा होता है उसी के जरिये भोजन और जीवन विकसित होता है उस दौरान बच्चे को कोई चिंता नहीं होती क्योंकि मां के द्वारा उसे जीवित रखने के लिए जरूरी तत्व पहुंच जाता है।
जन्म के बाद ही उस बच्चे के जीवन में दुख शुरू होता है, क्योंकि मां के जोड से उस बच्चे का जोड टूट जाता है। अब उस बच्चे को अपना शरीर खुद चलाना पड़ेगा। जहां जोड़ खत्म वैसे ही दुख शुरू।
इस तरह ईश्वर और हमारे बीच एक जोड़ होता है। लेकिन उस जोड़ को हम तोड़ लेते हैं। दुख बढ़ता जाता है। प्रार्थना साधना के द्वारा कोई संत दुबारा ईश्वर से उस जोड़ को जोड़ देते हैं,
और वह इस तरह से व्यक्ति निश्चिंत हो जाता है जैसे मां के गर्भ में बच्चा होता है। हर दिन की प्रार्थना, ईश्वर हमारे बीच उस जोड़ को बनाए रखते हैं। वरना दिन प्रतिदिन हमारा दुख बढ़ता चला जाता है।
जय श्री राम