अयोध्या की कथा
विक्रमादित्य ने अयोध्या की खोज शुरू की और तीर्थों के राजा प्रयाग से मिले। प्रयाग के मार्गदर्शन में, विक्रमादित्य ने उस स्थान को चिह्नित किया लेकिन फिर भूल गए कि वह कहाँ था। एक योगी ने उनसे कहा कि उन्हें एक गाय और बछड़े को मुक्त करना चाहिए; अयोध्या वह जगह होगी जहाँ गाय के थन से दूध निकलना शुरू हो जाएगा।
अयोध्या नगरी में राम मंदिर का उद्धाटन हो चुका है और राम अपने बाल स्वरूप में मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए जा चुके हैं. आज जिस स्थान पर राम मंदिर बना है, कहते हैं उस स्थान को सबसे पहले उज्जैन के प्रतापी राजा विक्रमादित्य ने ढूंढा था. इस खोज से जुड़ी एक कहानी भी है जिसे भारत के सबसे छोटे कथावाचक अभिनव अरोड़ा ने हाल ही में आजतक से बातचीत में साझा किया है. अभिनव सोमवार को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के सम्मिलित हुए थे जहां उन्होंने यह कथा सुनाई.”
विक्रमादित्य ने राम के जन्मस्थान को कैसे ढूंढा?
कथावाचक अभिनव अरोड़ा ने बताया, एक बार उज्जैन के राजा विक्रमादित्य अयोध्या आए ताकि वो राम के जन्मस्थान को देख सकें. लेकिन वहां बहुत घूमने पर भी कोई राजा को यह नहीं बता सका कि राम का असली जन्मस्थान आखिर कहां है. किसी को इस बात की जानकारी ही नहीं थी. ऐसे में उदास राजा सरयू नदी के तट पर गए.”
वहां उन्होंने देखा कि एक काले रंग का व्यक्ति काले रंग के घोड़े पर बैठकर उनकी तरफ बढ़ता चला आ रहा है. घोड़े से उतरकर अजनबी व्यक्ति ने अपने वस्र उतारे और सरयू में स्नान करने लगा. जैसे ही उसने नदी में डुबकी लगाई, एक चमत्कार हुआ. राजा ने देखा कि काले रंग का व्यक्ति गोरा हो गया. राजा यह देखकर हैरान रह गए.”
उन्होंने अजनबी से पूछा कि ये कैसे हुआ तब अजनबी ने बताया, ‘मैं सभी तीर्थों का राजा प्रयागराज हूं. जब मैं सबके पाप धो-धोकर काला हो जाता हूं तब मैं यहां पर स्वच्छ होने के लिए आता हूं.’
इतनी बात सुनकर राजा ने प्रयागराज को अपना परिचय दिया और कहा, ‘मैं आपको हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं. आप सिद्ध पुरुष लगते हैं. क्या आप बता पाएंगे कि श्रीराम का असली जन्मस्थान अयोध्या में कहां पर था?’
राजा का सवाल सुन प्रयागराज ने कहा कि उनके तट पर स्नान करने वालों की लंबी कतार है और इसलिए उनके पास समय नहीं है, उन्हें जाना होगा क्योंकि लोग उनका इंतजार कर रहे हैं. जाते-जाते प्रयागराज ने राजा से कहा, ‘इस प्रश्न का उत्तर आपको काशी विश्वनाथ में मिलेगा, इसलिए हे राजन! आप काशी विश्वनाथ चले जाएं.’
प्रयागराज की बात सुन राजा काशी विश्वनाथ की तरफ बढ़ चले. वहां पहुंचते ही उन्हें एक ब्राह्मण दिखे. ब्राह्मण के भेष में वो देवों के देव महादेव यानी शंकर भगवान थे.
भगवान शंकर ने राजा से कहा, ‘देखो मुझे मालूम है कि तुम यहां किस उद्देश्य से आए हो.’
भगवान शंकर ने राजन को एक गाय दी और कहा कि इस गाय को लेकर अयोध्या जाओ और इसे लेकर पूरे शहर में घूमो. जहां यह गाय खुद से ही दूध देने लगेगी, समझ लेना कि वही राम का असली जन्मस्थान है.