ख्वाहिश नहीं, मुझे मशहूर होने की, एक अजीब सी’दौड़’ है ये जिन्दगी,जीवन की “भागदौड़” में क्यूँ वक्त के साथ, “रंगत “खो जाती है ? कुछ “अनमोल” लोगोंसे-“रिश्ते” रखता हूँ – मुंशी प्रेमचंद जी की एक “सुंदर कविता
मुंशी प्रेमचंद जी की एक "सुंदर कविता", जिसके एक-एक शब्द को, बार-बार "पढ़ने" को "मन करता" है-_ ख्वाहिश नहीं, मुझेमशहूर होने की," _आप मुझे "पहचानते" हो,_ _बस इतना ही "काफी"…